पोंगल पर पीएम मोदी का संदेश: काशी-तमिल संगम से सशक्त हुआ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’
सोमनाथ से काशी-तमिल संगम तक, सांस्कृतिक चेतना पर पीएम मोदी का संदेश
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पोंगल के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग पोस्ट के जरिए साझा किए विचार
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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और तमिल संस्कृति से जुड़े अनुभवों का किया उल्लेख
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युवाओं की बड़ी भागीदारी को राष्ट्रीय एकता के लिए बताया शुभ संकेत
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काशी-तमिल संगम को बताया सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने वाला अनूठा प्रयास
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 15 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि काशी-तमिल संगम जैसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक एकता को और गहराई देते हैं तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूती प्रदान करते हैं। पोंगल के विशेष अवसर पर जारी अपने संदेश और ब्लॉग पोस्ट में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ यात्रा, काशी-तमिल संगम की उपलब्धियों और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का अनुभव
प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेने पवित्र सोमनाथ भूमि पर गए थे। यह आयोजन वर्ष 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण की हजारवीं बरसी के उपलक्ष्य में हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए लोगों ने इतिहास, संस्कृति और भारत की अटूट चेतना के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
संगम से जुड़े प्रतिभागियों से संवाद
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की मुलाकात ऐसे लोगों से हुई, जो पहले सौराष्ट्र-तमिल संगम और काशी-तमिल संगम में भाग ले चुके थे। इन अनुभवों को सुनकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मंच भारत की विविधताओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
‘मन की बात’ और तमिल भाषा
अपने ब्लॉग पोस्ट में प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि तमिल भाषा न सीख पाने का उन्हें जीवनभर अफसोस रहेगा। साथ ही कहा कि बीते वर्षों में तमिल संस्कृति को देशभर में लोकप्रिय बनाने और राष्ट्रीय एकता को आगे बढ़ाने के कई प्रयास किए गए हैं।
काशी और तमिल संस्कृति का प्राचीन संबंध
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी से बेहतर इस सांस्कृतिक संगम के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। काशी सदियों से ज्ञान, अर्थ और मोक्ष की खोज का केंद्र रही है। काशी और तमिल संस्कृति का रिश्ता अत्यंत प्राचीन है—काशी में बाबा विश्वनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वरम इसकी मिसाल हैं। तेनकासी को ‘दक्षिण काशी’ कहा जाता है, जो इस सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करता है।
काशी-तमिल संगम के संस्करण
प्रधानमंत्री ने बताया कि काशी-तमिल संगम का पहला संस्करण वर्ष 2022 में आयोजित हुआ था। इसमें तमिलनाडु से विद्वान, कारीगर, छात्र, किसान और लेखक काशी, प्रयागराज और अयोध्या पहुंचे थे।
चौथा संस्करण 2 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जिसकी थीम ‘तमिल कर्कलाम: लर्न तमिल’ रही। इसके माध्यम से काशी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को तमिल भाषा सीखने का अवसर मिला।
ग्रंथ अनुवाद और विशेष अभियान
इस संस्करण में प्राचीन तमिल ग्रंथ तोल्काप्पियम का चार भारतीय और छह विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया। इसके अलावा ‘सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन’ तेनकासी से काशी तक निकाली गई, जिसमें स्वास्थ्य जागरूकता, नेत्र जांच और डिजिटल साक्षरता जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए।
युवाओं की भागीदारी पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों युवाओं की भागीदारी उन्हें सबसे अधिक खुशी देती है, क्योंकि यह युवाशक्ति के अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की भावना को दर्शाती है। उन्होंने भारतीय रेल द्वारा चलाई गई विशेष ट्रेनों और उत्तर प्रदेश के लोगों की आतिथ्य भावना की सराहना की।
समापन समारोह और संदेश
समापन समारोह रामेश्वरम में हुआ, जिसमें सी. पी. राधाकृष्णन शामिल हुए और राष्ट्रीय एकता पर प्रेरक संबोधन दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी-तमिल संगम ने सांस्कृतिक समझ, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जन-संपर्क को सशक्त किया है। अंत में उन्होंने संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल और माघ बिहू जैसे पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया।