आप नोटिस से नहीं रोक सकते, ममता की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट

बंगाल के पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त को हटाने की माँग सुप्रीम कोर्ट में

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  • कोलकाता में आईपीएसी कार्यालय पर छापेमारी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा
  • प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन पर जाँच में बाधा का आरोप लगाया
  • मुख्यमंत्री की ओर से दी गई दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
  • पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई की माँग

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 15 जनवरी: कोलकाता में भारतीय राजनीतिक कार्यनीति समिति के कार्यालय पर हुई छापेमारी से जुड़े मामले में गुरुवार को भारत का सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी के समय घटे पूरे घटनाक्रम को विस्तार से अदालत के समक्ष रखा और कड़ी कार्रवाई की माँग की।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से गंभीर आरोप

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का जाँच स्थल पर अधिकारियों के साथ पहुँचना यह दर्शाता है कि उन्होंने क़ानून को अपने हाथ में लेने का एक पैटर्न बना लिया है।

बिना अनुमति जाँच स्थल में प्रवेश का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा सत्रह के तहत जाँच चल रही थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री बिना किसी अनुमति के उस कार्यालय में प्रवेश कर गईं, जहाँ छापेमारी की जा रही थी। आरोप है कि वहाँ से महत्त्वपूर्ण फ़ाइलें, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख ले लिए गए, जिनमें एक जाँच अधिकारी का मोबाइल फ़ोन भी शामिल था।

पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस आयुक्त मुख्यमंत्री के साथ मौजूद थे। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने जाँच एजेंसी की मदद करने के बजाय राजनीतिक नेतृत्व का साथ दिया। यहाँ तक कि कुछ अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे दिखाई दिए।

हाईकोर्ट में हंगामे का भी ज़िक्र

सॉलिसिटर जनरल ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान हुए कथित हंगामे का सिलसिलेवार विवरण भी सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कथित प्रभाव के चलते हालात ऐसे बने कि न्यायाधीश को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

मुख्यमंत्री की ओर से दी गई दलीलें

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव से पहले की गई छापेमारी को लेकर दलीलें दीं। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते।

अदालत का सवाल और जाँच एजेंसी का जवाब

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि यह मामला सुनवाई योग्य कैसे है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह मामला अत्यंत चौंकाने वाला है, क्योंकि एक मुख्यमंत्री उस स्थान पर पहुँचीं, जहाँ धनशोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत जाँच चल रही थी।

नई याचिका और निलंबन की माँग

प्रवर्तन निदेशालय ने सर्वोच्च न्यायालय में एक नई याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हटाने तथा निलंबित करने की माँग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने जाँच में बाधा डाली और साक्ष्यों की कथित चोरी में सहयोग किया।

पुलिस आयुक्त पर भी आरोप

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज कुमार को भी पक्षकार बनाया है और उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की है।

जाँच एजेंसी का दावा

जाँच एजेंसी का कहना है कि छापेमारी के दौरान उसके अधिकारियों को डराया-धमकाया गया, महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ छीने गए और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई। एजेंसी ने इसे निष्पक्ष जाँच पर सीधा हमला बताया है।

बीएनएस की गंभीर धाराएँ लग सकती हैं

प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की सत्रह गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए जा सकते हैं।

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