शक्सगाम घाटी विवाद फिर तेज: भारत ने चीन की परियोजनाओं को बताया अवैध
लद्दाख से सियाचिन तक बढ़ी चिंता, शक्सगाम घाटी पर टकराव के संकेत
शक्सगाम घाटी को भारत अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है
1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से यह इलाका चीन को सौंपा
चीन यहाँ बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ चला रहा है
भारत ने सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली|13 जनवरी: शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उत्तरी हिस्से में स्थित है। यह सियाचिन ग्लेशियर के ठीक उत्तर में पड़ती है और रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
1947 से पहले शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा थी। 1948 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा किया, जिसमें यह क्षेत्र भी शामिल था। इसके बाद 1963 में पाकिस्तान ने चीन के साथ सीमा समझौता कर शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी।
1963 का समझौता क्यों विवादित
भारत का कहना है कि पाकिस्तान को इस क्षेत्र को किसी अन्य देश को सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। यही कारण है कि भारत इस समझौते को शुरू से ही अवैध मानता आया है। समझौते में यह भी उल्लेख था कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के बाद सीमा पर दोबारा बातचीत की जा सकती है।
भारत का आधिकारिक रुख
भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को भी मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।
चीन का जवाब
चीन ने भारत की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी उसका क्षेत्र है और वहाँ चल रही बुनियादी ढांचा गतिविधियाँ पूरी तरह उचित हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने 1960 के दशक के सीमा समझौते को अपने दावे का आधार बताया।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम
शक्सगाम घाटी सियाचिन ग्लेशियर के बेहद करीब है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन यहां स्थायी सड़कें और सैन्य ढांचा विकसित करता है, तो भारत को उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर एक साथ सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
आगे क्या संकेत
भारत और चीन दोनों अब इस क्षेत्र को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। चीन द्वारा खुले तौर पर शक्सगाम घाटी को अपना क्षेत्र बताना भविष्य में बड़े सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध के संकेत माना जा रहा है।