ड्रोन, नैरेटिव और लॉबिंग के ज़रिये भारत को घेरने की पाकिस्तानी रणनीति

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पूनम शर्मा
भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव अब पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने यह समझ लिया कि सीधे सैन्य मोर्चे पर वह भारत का सामना नहीं कर सकता। इसलिए उसने रणनीति बदली—अब युद्ध ड्रोन, आतंक, अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव और अमेरिकी लॉबिंग के ज़रिये लड़ा जा रहा है। हाल के घटनाक्रम साफ़ संकेत देते हैं कि पाकिस्तान इस समय खुद को अंतरराष्ट्रीय समर्थन, खासकर अमेरिका के संरक्षण में, असामान्य रूप से सुरक्षित महसूस कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर: सैन्य जीत, लेकिन नैरेटिव की जंग

ऑपरेशन सिंदूर भारत के लिए एक निर्णायक सैन्य सफलता थी। आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले हुए, लॉन्च पैड तबाह किए गए और पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली उजागर हो गई। नूर खान एयरबेस तक भारतीय हमले पाकिस्तान ने स्वयं स्वीकार किए।
लेकिन सैन्य हार के बावजूद पाकिस्तान ने नैरेटिव वॉर में भारी निवेश किया। सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय प्रेस और कूटनीतिक लॉबिंग के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान ने भारत को नुकसान पहुँचाया है।

ड्रोन वार: LOC पर नई चुनौती

पिछले 12 घंटों में जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान से आए संदिग्ध ड्रोन देखे गए।
स्थानीय लोगों ने ड्रोन की आवाज़ें सुनने और उन्हें उड़ते देखने की पुष्टि की है। कई मामलों में भारतीय सुरक्षा बलों ने फायरिंग कर ड्रोन मार गिराए, जबकि कुछ वापस पाकिस्तान की ओर लौट गए।
यह स्पष्ट करता है कि अब युद्ध फ्रंटलाइन पर नहीं, बल्कि ड्रोन और टेक्नोलॉजी के ज़रिये लड़ा जा रहा है।

आतंकी धमकियाँ और अजहर का ऑडियो

इसी बीच जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वह दावा करता है कि उसके पास “हजारों फिदायीन हमलावर” तैयार हैं।
यह बयान ऑपरेशन सिंदूर में उसके नेटवर्क को हुए नुकसान के बाद आया है और यह दर्शाता है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अब बदले की भावना से संचालित हो रहा है। अमेरिका में पाकिस्तान की लॉबिंग: 60 कॉल, 5 मिलियन डॉलर सबसे गंभीर खुलासा अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के दस्तावेज़ों से हुआ।
7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका में एक लॉ फर्म को हायर कर लगभग 60 बार कॉल करवाए, ताकि भारत पर दबाव बनाकर सैन्य कार्रवाई रुकवाई जा सके।
इस लॉबिंग पर पाकिस्तान ने करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 45 करोड़ रुपये) खर्च किए। यह पैसा केवल युद्ध रोकने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका को यह दिखाने के लिए था कि पाकिस्तान अभी भी एक “अपरिहार्य खिलाड़ी” है।

ट्रंप फैक्टर और पाकिस्तान का आत्मविश्वास

डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध “रुकवाया”। भारत द्वारा इस दावे को कोई आधिकारिक श्रेय न दिए जाने से ट्रंप खेमे में नाराज़गी दिखती है।
पाकिस्तान इसी नाराज़गी का लाभ उठाकर खुद को अमेरिका का करीबी साबित करने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि पाकिस्तान इस समय असामान्य आत्मविश्वास में है।

रक्षा सौदे और फर्जी जीत का बाज़ार

नैरेटिव के सहारे पाकिस्तान ने JF-17 फाइटर जेट को “कॉम्बैट-प्रूवन” बताकर बेचने की कोशिश की।
परिणामस्वरूप बांग्लादेश, सूडान और अन्य देशों से अरबों डॉलर के रक्षा सौदों की बातें सामने आईं। पाकिस्तान यह प्रचार करने में सफल रहा कि उसने भारत को नुकसान पहुँचाया, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत थी।  बांग्लादेश, नेपाल और नया घेरा । पाकिस्तान की रणनीति केवल पश्चिमी सीमा तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों को प्रोत्साहन ,नेपाल सीमा के पास सैकड़ों मदरसों को फंडिंग ,लश्कर और जैश जैसे संगठनों का क्षेत्रीय विस्तार ,ये सभी संकेत देते हैं कि भारत को मल्टी-फ्रंट प्रेशर में डालने की तैयारी है।

रूस की कमजोरी और बदला हुआ संतुलन

पहले रूस भारत के लिए एक मजबूत मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक सहारा था। लेकिन यूक्रेन युद्ध में उलझे रूस की भूमिका अब सीमित दिखती है।
पाकिस्तान ने इस कमजोरी को पहचाना और इसे अपने पक्ष में अवसर के रूप में देखना शुरू किया।

निष्कर्ष: भारत के लिए असली चुनौती

आज की लड़ाई केवल सीमा पर नहीं है—यह लड़ाई है नैरेटिव, कूटनीति, टेक्नोलॉजी और मनोवैज्ञानिक दबाव की। भारत को सैन्य ताकत के साथ-साथ आक्रामक कूटनीति, स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय संचार और नैरेटिव नियंत्रण पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। क्योंकि आने वाला समय गोलियों से कम, और कहानियों से ज़्यादा लड़ा जाएगा।

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