सरकार ने खारिज की सोर्स कोड शेयरिंग वाली रिपोर्ट, बताया भ्रामक और तथ्यहीन

साइबर सुरक्षा पर संवाद जारी, जबरन सोर्स कोड साझा कराने की खबर गलत

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  • सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड साझा कराने की खबर को भ्रामक बताया
  • आईटी मंत्रालय ने रिपोर्ट को सनसनी फैलाने वाला करार दिया
  • साइबर सुरक्षा और निजता पर उद्योग से नियमित परामर्श जारी
  • इंडस्ट्री एसोसिएशन ने भी खबर को गलत संदर्भ में बताया

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली |12 जनवरी: केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों से उनका सोर्स कोड साझा कराने से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव न तो विचाराधीन है और न ही भविष्य में इस तरह का कोई जबरन कदम उठाने की योजना है। सरकार के अनुसार, यह रिपोर्ट भ्रामक तथ्यों पर आधारित और अनावश्यक रूप से सनसनी फैलाने वाली है।

रिपोर्ट में आधिकारिक पक्ष नहीं

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि संबंधित रिपोर्ट में किसी भी स्मार्टफोन कंपनी या उनसे जुड़ी इंडस्ट्री एसोसिएशन का आधिकारिक बयान शामिल नहीं किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, उद्योग संगठनों की टिप्पणियों को नजरअंदाज कर खबर को गलत संदर्भ में पेश किया गया।

साइबर सुरक्षा पर संवाद जारी

मंत्रालय ने साफ किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और नागरिकों की निजता की रक्षा करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मोबाइल सुरक्षा से जुड़े नियमों पर सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ एक व्यवस्थित और पारदर्शी सलाह-मशविरा प्रक्रिया लगातार चल रही है।

कई तकनीकी मुद्दों पर परामर्श

आईटी मंत्रालय ने बताया कि वह उद्योग जगत से सेफ्टी कंप्लायंस, ईएमआई-ईएमसी मानक, भारतीय भाषाओं के समर्थन, इंटरफेस आवश्यकताओं और सुरक्षा मानकों जैसे विषयों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श करता है। सरकार का रुख सहयोगात्मक है और किसी भी नीति निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय ली जाती है।

उद्योग की चिंताओं पर खुले मन से विचार

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उद्योग की सभी जायज चिंताओं पर खुले मन से विचार किया जाएगा। नीति निर्माण में देश के हितों के साथ-साथ उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों को भी संतुलित रूप से शामिल किया जाएगा।

इंडस्ट्री एसोसिएशन का भी स्पष्टीकरण

इससे पहले इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने भी कहा था कि सोर्स कोड से जुड़ी चर्चाएं कोई नई बात नहीं हैं और इस पर संवाद पिछले कई वर्षों से चल रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, इसे किसी अचानक या बाध्यकारी फैसले के रूप में देखना सही नहीं है।

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