वेनेजुएला का तेल अमेरिकी गारंटी: निवेश या नया साम्राज्यवादी प्रयोग?

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पूनम शर्मा
वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाज़ार के केंद्र में है। लेकिन इस बार कारण कोई आंतरिक सुधार या आर्थिक पुनरुद्धार नहीं, बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक असाधारण वादा है—तेल कंपनियों को “पूरी सुरक्षा” की गारंटी। ट्रंप ने अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से साफ कहा है कि वे वेनेजुएला में निवेश करें, क्योंकि अब वे “वेनेजुएला से नहीं, सीधे अमेरिका से डील कर रहे होंगे।”

यह बयान जितना आकर्षक लगता है, उतना ही विवादास्पद भी है। सवाल सिर्फ 100 अरब डॉलर के निवेश का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें एक संप्रभु देश के संसाधनों पर नियंत्रण का दावा किसी दूसरी शक्ति द्वारा किया जा रहा है।

ट्रंप की पेशकश: पैसा निजी, सुरक्षा सरकारी

व्हाइट हाउस में हुई बैठक में ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि निवेश सरकार का नहीं होगा, बल्कि “बिग ऑयल” कंपनियों का होगा। लेकिन सुरक्षा—राजनीतिक, सैन्य और कानूनी—अमेरिकी सरकार प्रदान करेगी। यह मॉडल अपने आप में अनोखा है, जहां निजी पूंजी को राज्य शक्ति का कवच दिया जा रहा है।

ट्रंप के अनुसार, अमेरिका वेनेजुएला के तेल उत्पादन, निर्यात, रिफाइनिंग और वितरण को पूरी तरह “स्थिर” करना चाहता है। बीते एक महीने में वेनेजुएला से जुड़े पांच तेल टैंकरों को जब्त किया जाना इसी रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

लेकिन क्या यह स्थिरता है या नियंत्रण?

कंपनियों की हिचक: इतिहास डराता है

तेल कंपनियां उत्साहित दिखने के बजाय सतर्क नजर आ रही हैं। इसका कारण स्पष्ट है। वेनेजुएला का हालिया इतिहास राष्ट्रीयकरण, संपत्ति ज़ब्ती और अनुबंध उल्लंघन से भरा पड़ा है। एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों के अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स 2007 में ह्यूगो चावेज़ सरकार के दौरान जब्त कर लिए गए थे।

एक्सॉनमोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में वेनेजुएला “निवेश योग्य” नहीं है। जब तक वहां के क़ानूनी ढांचे, हाइड्रोकार्बन कानून और निवेश सुरक्षा में ठोस बदलाव नहीं होते, तब तक जोखिम बहुत अधिक है।

यह बयान बताता है कि ट्रंप की “पूरी सुरक्षा” की गारंटी कागज़ पर भले मजबूत हो, लेकिन ज़मीन पर भरोसा अभी अधूरा है।

राजनीति बनाम बाज़ार का यथार्थ

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियां “देखो और इंतज़ार करो” की नीति पर चल रही हैं। वे न तो खुला समर्थन कर रही हैं, न ही पूरी तरह इनकार। यह सावधानी इसलिए भी है क्योंकि वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता अभी भी अनिश्चित है।

हालांकि ट्रंप का दावा है कि अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ उनके प्रशासन के साथ पर्दे के पीछे सहयोग कर रही हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर वही नेतृत्व अमेरिकी कार्रवाई को “अपहरण” और “साम्राज्यवादी हस्तक्षेप” कह रहा है।

यह दोहरा संदेश निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

तेल, चीन और भू-राजनीति

एक अहम पहलू यह भी है कि वेनेजुएला का अधिकांश तेल अब तक चीन को जाता रहा है। अमेरिका चाहता है कि यह प्रवाह बदले और तेल अमेरिकी बाज़ारों के ज़रिए बेचा जाए। अल्पकालिक तौर पर इसमें कुछ बढ़ोतरी संभव है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो पहले से वहां मौजूद हैं, जैसे शेवरॉन।

लेकिन दीर्घकालिक निवेश के लिए कंपनियां यह जानना चाहती हैं कि राजस्व का बंटवारा कैसे होगा। वेनेजुएला को कितना मिलेगा? सामाजिक ज़रूरतों, खाद्य आपूर्ति और बुनियादी सेवाओं के लिए धन जाएगा या नहीं—इस पर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है।

आलोचना: “माफिया-स्टाइल व्यवस्था”?

इस पूरी प्रक्रिया पर तीखी आलोचना भी हो रही है। उपभोक्ता अधिकार समूह पब्लिक सिटिजन के टायसन स्लोकम ने इसे “हिंसक साम्राज्यवाद” करार दिया है। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र या विकास नहीं, बल्कि अरबपतियों को वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण सौंपने की योजना है।

यूसीएलए के विशेषज्ञ बेंजामिन रैड ने इसे “माफिया-स्टाइल रैकेट” जैसा बताया—जहां सुरक्षा के बदले मुनाफ़े की हिस्सेदारी तय की जाती है। यह टिप्पणी इसलिए गंभीर है क्योंकि यह अमेरिका की भूमिका को एक निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं, बल्कि शक्ति-आधारित कारोबारी संरक्षक के रूप में दिखाती है।

वेनेजुएला के लिए असली खतरा

सबसे बड़ा सवाल वेनेजुएला के भविष्य का है। यदि तेल से होने वाली आय देश की जनता तक नहीं पहुंचती, तो आर्थिक संकट और गहराएगा। अस्थिरता बढ़ेगी, विरोध तेज़ होंगे और राजनीतिक वैधता और कमजोर पड़ेगी।

इतिहास बताता है कि संसाधन-समृद्ध लेकिन संप्रभुता-विहीन देश अक्सर बाहरी ताकतों के प्रयोगशाला बन जाते हैं।

निष्कर्ष: निवेश या नियंत्रण?

डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव आर्थिक पुनरुद्धार की भाषा में लिपटा हुआ है, लेकिन उसके भीतर शक्ति संतुलन की एक कठोर वास्तविकता छिपी है। सवाल यह नहीं कि तेल निकलेगा या नहीं। सवाल यह है कि उसका लाभ किसे मिलेगा—वेनेजुएला की जनता को या वैश्विक कंपनियों और भू-राजनीतिक हितों को।

जब तक पारदर्शिता, कानूनी सुरक्षा और जनहित की गारंटी स्पष्ट नहीं होती, तब तक “पूरी सुरक्षा” का वादा निवेश से ज़्यादा एक राजनीतिक सौदा ही बना रहेगा।

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