ट्रंप का दौर अस्थायी, मोदी की लोकप्रियता स्थायी; अमेरिकी विशेषज्ञ ने बताया फर्क
ब्रेमर बोले- ट्रंप के फैसले पलट सकता है अगला राष्ट्रपति
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प्रधानमंत्री मोदी एक दशक से अधिक समय से लोकप्रिय और सत्तारूढ़
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अमेरिका में हर चार वर्ष में नेतृत्व बदलने से नीति निरंतरता प्रभावित
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वेनेजुएला से जुड़े लाभ भी लंबे समय तक टिकने पर संदेह
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ट्रंप वर्ष 2029 में पद छोड़ेंगे, नीतियों की स्थिरता पर सवाल
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली |07 जनवरी: अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति को लेकर भू-राजनीतिक विशेषज्ञ इयान ब्रेमर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तुलना करते हुए कहा कि दोनों की स्थिति और जनसमर्थन में बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, ट्रंप का कार्यकाल सीमित है और उनके कई निर्णय भविष्य में बदले जा सकते हैं, जबकि मोदी लंबे समय से लोकतांत्रिक समर्थन के साथ सत्ता में बने हुए हैं।
अमेरिका और भारत की राजनीतिक व्यवस्था
ब्रेमर ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में हर चार वर्ष में सत्ता परिवर्तन होता है, जिससे नीतियों में स्थायित्व नहीं बन पाता। इसके विपरीत भारत जैसे देशों में नेतृत्व लंबे समय तक रहने से योजनाओं को लागू करने और परिणाम देखने का अवसर मिलता है।
“यह मोदी या शी जैसा नेतृत्व नहीं”
विशेषज्ञ के अनुसार ट्रंप की तुलना शी जिनपिंग या मोदी से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ट्रंप न तो लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता हैं और न ही उनकी लोकप्रियता स्थिर मानी जाती है। ऐसे में उनके निर्णयों का प्रभाव भी अल्पकालिक हो सकता है।
वेनेजुएला और तेल का भविष्य
ब्रेमर ने वेनेजुएला के संदर्भ में कहा कि वहां से तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए राजनीतिक स्थिरता और भरोसेमंद आर्थिक माहौल जरूरी है। मौजूदा उत्पादन पुराने स्तर से काफी कम है और बिना स्थिरता के निवेशकों का भरोसा बनना कठिन है।
ट्रंप के बाद की अनिश्चितता
उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों का निवेश काल राष्ट्रपतियों के कार्यकाल से अधिक लंबा होता है। इसलिए यह देखना अहम होगा कि ट्रंप के बाद अमेरिकी नीतियां किस दिशा में जाती हैं। यदि राजनीतिक समर्थन और नीतियां बदलीं, तो मौजूदा लाभ भी समाप्त हो सकते हैं।