शेख हसीना ने खालिदा जिया को दी भावुक श्रद्धांजलि
दशकों तक चली राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बाद शेख हसीना ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन को बताया बांग्लादेश की राजनीति के लिए बड़ा नुकसान, लोकतंत्र में योगदान को किया याद।
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शेख़ हसीना ने खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके योगदान को सराहा।
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अवामी लीग के आधिकारिक मंच से जारी संदेश में इसे राजनीति के लिए “गहरा नुकसान” कहा गया।
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हसीना ने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान और परिवार के प्रति संवेदनाएं जताईं।
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सजीब वाजेद जॉय ने भी खालिदा जिया के राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।
समग्र समाचार सेवा
ढाका | 30 दिसंबर:बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक आमने-सामने खड़ी रहीं दो सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं—शेख हसीना और खालिदा जिया—के बीच चली आ रही कड़वी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का अध्याय अब एक भावुक मोड़ पर समाप्त हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
लोकतंत्र में योगदान को किया याद
अवामी लीग के आधिकारिक मंच पर जारी संदेश में शेख हसीना ने कहा कि खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और देश में लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में उनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। हसीना ने इसे न केवल बांग्लादेश की राजनीति, बल्कि बीएनपी के नेतृत्व के लिए भी “गहरा नुकसान” बताया।
परिवार के लिए संवेदना
शेख हसीना ने खालिदा जिया की आत्मा की शांति की कामना करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने विशेष रूप से जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।
‘दो बेगम’ की लंबी राजनीतिक कहानी
खालिदा जिया और शेख हसीना ने तीन दशकों से अधिक समय तक बांग्लादेश की राजनीति पर प्रभुत्व बनाए रखा। दोनों नेताओं ने बारी-बारी से सत्ता संभाली और उनकी पार्टियों—बीएनपी और अवामी लीग—के बीच तीखा राजनीतिक संघर्ष चलता रहा। विदेशी मीडिया में यह प्रतिद्वंद्विता ‘दो बेगम की जंग’ के नाम से जानी जाती रही।
सजीब वाजेद जॉय की प्रतिक्रिया
शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने भी खालिदा जिया के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि जिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कई नीतिगत योगदान दिए और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।