इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद भाजपा को रिकॉर्ड चंदा, कांग्रेस का दान घटा
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भाजपा को 6,654 करोड़ रुपये मिले, कांग्रेस का चंदा 522 करोड़ पर सिमटा
-
भाजपा को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6,654.93 करोड़ रुपये का चंदा
-
कांग्रेस के चंदे में 43 प्रतिशत की गिरावट, 522.13 करोड़ रुपये ही मिले
-
भाजपा को मिले कुल चंदे का लगभग 40 प्रतिशत चुनावी ट्रस्टों से
-
इलेक्टोरल बॉन्ड योजना रद होने के बाद पहला पूरा वित्तीय वर्ष
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 22 दिसंबर: राजनीतिक दलों को चंदा 2024-25 के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। इलेक्टोरल बॉन्ड योजना समाप्त होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी का चंदे में दबदबा बरकरार रहा है। चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6,654.93 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 68 प्रतिशत अधिक है। इसके विपरीत कांग्रेस के चंदे में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी ने निर्धारित समय से दो दिन पहले 8 दिसंबर को चुनाव आयोग को चंदे की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में 20,000 रुपये से अधिक के दान का विवरण शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार यह चंदा 1 अप्रैल 2024 से 30 मार्च 2025 के बीच प्राप्त हुआ, जिस दौरान देश में लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए।
चुनावी ट्रस्ट और कॉर्पोरेट दान
रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को मिले कुल चंदे का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चुनावी ट्रस्टों से आया। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट और न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट प्रमुख दानदाता रहे। इसके अलावा दवा, उद्योग, रियल एस्टेट और आभूषण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने भी बड़ी राशि का योगदान दिया। कई भाजपा नेताओं ने भी व्यक्तिगत स्तर पर पार्टी को चंदा दिया।
अन्य दलों के चंदे में गिरावट
अन्य राजनीतिक दलों की बात करें तो कांग्रेस को इस वित्तीय वर्ष में 522.13 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो पिछले वर्ष के 1,129 करोड़ रुपये से लगभग 43 प्रतिशत कम है। तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, बीजू जनता दल और तेलुगु देशम पार्टी के चंदे में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि आम आदमी पार्टी के चंदे में वृद्धि देखने को मिली।
इलेक्टोरल बॉन्ड के बाद पहला वर्ष
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 पहला ऐसा पूरा वर्ष रहा, जब इलेक्टोरल बॉन्ड योजना लागू नहीं थी। फरवरी 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस योजना को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद सामने आए चंदे के आंकड़ों में भाजपा का दबदबा स्पष्ट रूप से नजर आया है।