नेशनल हेराल्ड केस: राहत या आफत? कांग्रेस के दांवपेंच की इनसाइड स्टोरी

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पूनम शर्मा
राजनीति में धारणाओं का खेल बड़ा दिलचस्प होता है। कभी-कभी हार को जीत बताकर पेश किया जाता है, तो कभी कानूनी बारीकियों के शोर में असली खतरा कहीं पीछे छिप जाता है। पिछले तीन दिनों से नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर देश के सियासी गलियारों में एक अजीब सा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर हैं, ढोल-नगाड़े बज रहे हैं और यह संदेश दिया जा रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ‘क्लीन चिट’ मिल गई है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? या फिर यह एक बड़े तूफान से पहले की शांति है?

जब आप इस मामले की गहराई में उतरते हैं, तो समझ आता है कि 16 दिसंबर को जो हुआ, वह राहत नहीं बल्कि सोनिया और राहुल गांधी के लिए एक नई ‘आफत’ की शुरुआत हो सकती है। मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इसे “केस बंद” होने की खबर की तरह चलाया, लेकिन हकीकत की परतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

क्या कोर्ट ने वाकई केस बंद कर दिया?

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जरिए राहुल और सोनिया को फंसाने की साजिश रची। लेकिन यहाँ एक तकनीकी पेंच है जिसे समझना जरूरी है। कोर्ट ने ED की वर्तमान चार्जशीट पर ‘कॉग्निजेंस’ (संज्ञान) लेने से फिलहाल इनकार किया है, क्योंकि इस मामले में पहले से कोई ठोस FIR दर्ज नहीं थी। नियम यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का केस तभी चलता है जब उसके पीछे कोई ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ यानी कोई प्राथमिक FIR (जैसे दिल्ली पुलिस या CBI की) हो।

इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर कांग्रेस ने इसे अपनी नैतिक जीत करार दे दिया। प्रियंका गांधी वाड्रा के चेहरों पर मुस्कान दिखी और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे दिग्गज वकीलों ने इसे केंद्र की हार बताया। लेकिन यह “राहत” केवल कागजी और अस्थायी है।

असली शिकंजा कसता जा रहा है, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले ही नेशनल हेराल्ड से जुड़ी भारी-भरकम संपत्तियों को ‘अटैच’ (कुर्क) कर लिया है।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस मामले में कुल ₹751.9 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है, जिसमें अचल संपत्तियों की कीमत ₹661.69 करोड़ और शेयरों की वैल्यू ₹90.21 करोड़ है।

यहाँ उन प्रमुख संपत्तियों की सूची दी गई है जिन पर ED ने कानूनी शिकंजा कसा है:

नेशनल हेराल्ड: जब्त संपत्तियों का ब्यौरा

संपत्ति का नाम स्थान विवरण
हेराल्ड हाउस (Herald House) बहादुर शाह जफर मार्ग, दिल्ली यह AJL का मुख्यालय है और सबसे प्रमुख संपत्ति मानी जाती है।
नेहरू भवन (Nehru Bhawan) बिशेश्वर नाथ रोड, लखनऊ लखनऊ के प्राइम लोकेशन पर स्थित यह इमारत भी ED के रडार पर है।
नेशनल हेराल्ड हाउस बांद्रा (ईस्ट), मुंबई मुंबई की इस बहुमंजिला इमारत की कीमत करोड़ों में है।
पंचकुला प्लॉट सेक्टर-6, हरियाणा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में पुन: आवंटित इस 3,360 वर्ग मीटर के प्लॉट को भी कुर्क किया गया है।
AJL के शेयर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के ₹90.21 करोड़ मूल्य के शेयर, जो अब ‘यंग इंडिया’ के पास हैं।
दिल्ली पुलिस की एंट्री और 420 का शिकंजा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब दिल्ली पुलिस ने अब इस मामले में ‘ठगी’ और धोखाधड़ी (धारा 420) का केस दर्ज कर लिया। असली खेल यहीं से शुरू होता है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली पुलिस अब उन सैकड़ों शेयरधारकों के बयान दर्ज कर रही है, जिन्हें नेशनल हेराल्ड की संपत्ति हड़पने के दौरान कथित तौर पर दरकिनार किया गया था।

1930 के दशक में ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (AJL) की स्थापना के समय सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों और नागरिकों ने इसमें अपना पैसा लगाया था। आरोप है कि सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी ‘यंग इंडिया’ ने इन शेयरधारकों की बिना सहमति के AJL की करोड़ों की संपत्ति को कौड़ियों के दाम अपने नाम कर लिया। इसमें पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू और शांति भूषण जैसे बड़े परिवारों के नाम भी बतौर शेयरधारक शामिल थे, जिन्हें कथित तौर पर अंधेरे में रखा गया।

सुब्रमण्यम स्वामी का वह ‘प्राइवेट कंप्लेंट’ मॉडल

कांग्रेस बार-बार कहती है कि यह मोदी सरकार की साजिश है। लेकिन ऐतिहासिक तथ्य कुछ और कहते हैं। यह केस सुब्रमण्यम स्वामी ने तब दर्ज कराया था जब केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। यह एक ‘प्राइवेट कंप्लेंट’ थी। सालों तक यह मामला सुस्त रहा क्योंकि स्वामी जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पा रहे थे या प्रक्रिया धीमी थी। ऐसा भी सुनने में आया है कि सुब्रमण्यम स्वामी को 200 करोड़ रुपये इस केस को स्लोडाउन या प्रक्रिया धीमी करने के लिए भी दिए गए थे ।

अब चूंकि दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है, तो ED के लिए रास्ता साफ हो गया है। जैसे ही दिल्ली पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी (जिसके लिए 60 दिनों का अनुमान है), ED मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक नया और पहले से कहीं ज्यादा मजबूत केस दर्ज करेगी। कोर्ट ने जो अभी संज्ञान लेने से मना किया है, वह सिर्फ इसलिए ताकि पुलिसिया प्रक्रिया पूरी हो जाए और कानूनी तौर पर कोई ‘लीकेज’ न रहे। यह ‘वाटरप्रूफ’ केस बनाने की तैयारी है।

डीके शिवकुमार की पेशी: जलते हुए सवाल

अगर वाकई सब कुछ खत्म हो गया है और गांधी परिवार ‘बरी’ हो गया है, तो फिर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को 19 दिसंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश होने का समन क्यों मिला?

डीके शिवकुमार को बतौर गवाह बुलाया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि नेशनल हेराल्ड को जिंदा करने के नाम पर जो पैसे का लेनदेन हुआ, उसमें शिवकुमार की भूमिका ‘मनी ट्रेल’ को समझने के लिए अहम है। कांग्रेस के ‘खजांची’ माने जाने वाले शिवकुमार से पूछताछ यह बताती है कि जांच की आंच अभी बुझी नहीं है, बल्कि अब उन कड़ियों को जोड़ा जा रहा है जो सीधे तौर पर वित्तीय हेराफेरी से जुड़ी हैं।

5000 करोड़ की संपत्ति और ‘यंग इंडिया’ का मायाजाल

इस पूरे विवाद की जड़ में वह 2000 से 5000 करोड़ रुपये की संपत्ति है जो दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में नेशनल हेराल्ड (AJL) के नाम पर है। नियम के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी किसी व्यावसायिक संस्था को लोन नहीं दे सकती थी, लेकिन उन्होंने 90 करोड़ का लोन दिया और फिर उसे महज 50 लाख में ‘यंग इंडिया’ को ट्रांसफर कर दिया। इसी ‘यंग इंडिया’ के 76% शेयर सोनिया और राहुल गांधी के पास हैं।

जांच एजेंसियों का सीधा सवाल है: “जिस संपत्ति पर सैकड़ों लोगों का हक था, वह अचानक दो व्यक्तियों की निजी जागीर कैसे बन गई?”

निष्कर्ष: यह जीत नहीं, केवल एक अंतराल है

सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन और “राहुल निखर कर आए” जैसे नारे शायद कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा सकते हैं, लेकिन अदालती कटघरे में नारे नहीं, सबूत चलते हैं। सोनिया गांधी फिलहाल इस मामले में जमानत पर हैं और उनकी यह जमानत रद्द नहीं हुई है। कोर्ट ने केस बंद करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि जांच को सही कानूनी प्रक्रिया (FIR के रास्ते) से आने को कहा है।

जैसे ही दिल्ली पुलिस अपनी चार्जशीट सौंपेगी, कांग्रेस के लिए मुश्किलें फिर से बढ़ेंगी। यह मामला अब ‘प्राइवेट कंप्लेंट’ से निकलकर ‘स्टेट वर्सेस गांधी परिवार’ बनने की ओर अग्रसर है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि कांग्रेस जिसे अपनी जीत बता रही है, वह दरअसल एक कानूनी चक्रव्यूह है, जिसमें वे और गहराई से फँसते  जा रहे हैं।

 

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