बंगाल के बाद अब केरल में भी एसआईआर की समय-सीमा एक हफ्ते बढ़ी
स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए वोटर लिस्ट संशोधन की तारीखों में बदलाव; ड्राफ्ट रोल 23 दिसंबर को जारी होगा
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चुनाव आयोग ने केरल में भी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा एक सप्ताह बढ़ाई।
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ड्राफ्ट इलेक्ट्रोरल रोल अब 23 दिसंबर को, जबकि फाइनल रोल 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगा।
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सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और राज्य सरकार के अनुरोध के बाद आयोग ने बढ़ोतरी पर निर्णय लिया।
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दावे, आपत्तियों की प्रक्रिया 23 दिसंबर से 22 जनवरी तक चलेगी।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 दिसंबर: पश्चिम बंगाल के बाद अब केरल में भी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मियाद बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों के बीच मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए यह फैसला लिया है। पहले यह प्रक्रिया 16 दिसंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन अब ड्राफ्ट इलेक्ट्रोरल रोल 23 दिसंबर को जारी किया जाएगा। वहीं, फाइनल इलेक्ट्रोरल रोल की नई तारीख 21 फरवरी 2026 तय की गई है।
केरल में स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों 9 और 11 दिसंबर को होने हैं और मतगणना 13 दिसंबर को होगी। ऐसे में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद निर्वाचन आयोग से एन्यूमरेशन फॉर्म और SIR प्रक्रिया से जुड़े चरणों की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को चुनाव आयोग से कहा था कि वह दो दिनों के भीतर निर्णय ले कि क्या चुनावी माहौल को देखते हुए SIR की मियाद बढ़ाई जा सकती है। कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए बताया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में लगा अमला और SIR में जुटी टीमें अलग-अलग हैं। इसके बाद कोर्ट ने राजनीतिक दलों को अपना पक्ष आयोग के सामने रखने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।
राज्य के मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के बाद आयोग ने अंतिम निर्णय देते हुए SIR शेड्यूल में संशोधन कर दिया। अब एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटलीकरण की अंतिम तारीख भी 18 दिसंबर कर दी गई है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने और अयोग्य नाम हटवाने के लिए 23 दिसंबर से 22 जनवरी तक दावा–आपत्तियां ली जाएंगी। इसी अवधि में पहली और दूसरी अपील की प्रक्रिया भी चलेगी।
आयोग का यह निर्णय उन लाखों मतदाताओं के लिए राहत लेकर आया है, जो अपनी वोटर लिस्ट में सुधार करवाना चाहते थे लेकिन समय की कमी के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे।