संसद ने तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी को मंजूरी दी

पान मसाला–तंबाकू पर उच्च कर से बनेगा स्वास्थ्य व राष्ट्रीय सुरक्षा कोष, निर्मला सीतारमण ने विपक्ष की आपत्तियों का सदन में दिया जवाब

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  • जीएसटी कंपनसेशन सेस खत्म होने के बाद लागू होगा नया एक्साइज ढांचा
  • अनमैन्युफैक्चर्ड तंबाकू पर 60–70% तक एक्साइज ड्यूटी का प्रस्ताव
  • पान मसाला और तंबाकू से होने वाली कमाई से बनेगा स्वास्थ्य-सुरक्षा कोष
  • सीतारमण ने सदन में कहा,टैक्स बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा, डिमेरिट गुड्स को ही निशाना

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,05 दिसंबर: संसद ने गुरुवार को तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने वाले संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि जीएसटी कंपनसेशन सेस समाप्त होने के बाद तंबाकू जैसे डिमेरिट उत्पादों पर कर लगाने की नई संरचना की आवश्यकता बन गई थी।

लोकसभा बुधवार को ही केंद्रीय एक्साइज (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर चुकी थी। इसके बाद राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत से पास कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल के उद्देश्य, किसानों से जुड़े सवालों और टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलावों पर विस्तार से स्पष्टीकरण दिया।

तंबाकू किसानों पर चिंता—सरकार का जवाब

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार तंबाकू किसानों को धीरे-धीरे अन्य नकदी फसलों की ओर स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि उनकी आय पर नकारात्मक असर न पड़े। उन्होंने कहा कि नई कर नीति का लक्ष्य किसानों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जोखिम पैदा करने वाले उत्पादों की खपत को कम करना है।

नए टैक्स ढांचे की प्रमुख विशेषताएँ

सरकार ने आश्वासन दिया कि जीएसटी प्रणाली के तहत तंबाकू उत्पादों पर 40% की टैक्स दर बनी रहेगी। नए कानून के माध्यम से केंद्र को तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का अधिकार मिलेगा। प्रस्ताव के अनुसार अनमैन्युफैक्चर्ड तंबाकू पर 60–70 प्रतिशत तक एक्साइज ड्यूटी लग सकती है।

दूसरी ओर, कई सांसदों ने सदन में “गुमराह करने वाले” विज्ञापनों पर चिंता जताई और तंबाकू–शराब के प्रचार को तत्काल बंद कराने की मांग की।

पान मसाला व तंबाकू से बनेगा हेल्थ–सिक्योरिटी फंड

लोकसभा में अलग से हुई चर्चा में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नया स्वास्थ्य-सुरक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर आम उपभोक्ताओं पर नहीं लगाया जाएगा। यह केवल उन उत्पादों पर लगेगा जो सेहत के लिए हानिकारक माने जाते हैं—जैसे पान मसाला और तंबाकू।

उन्होंने बताया कि पान मसाला पर पहले से ही 40% जीएसटी लागू है, इसलिए उस पर पारंपरिक एक्साइज लगाना संभव नहीं है। इस कारण सरकार उत्पादन क्षमता आधारित उपकर ला रही है, जिसमें हर फैक्ट्री की मशीन क्षमता के आधार पर टैक्स देनदारी तय होगी।

सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि नया तंत्र जीएसटी ढांचे से नहीं टकराएगा और यह व्यवस्था देश की राष्ट्रीय सुरक्षा व स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगी।

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