भारत की मानवीय मदद से अफगानिस्तान और श्रीलंका में खुशी की लहर
भारत की मदद के मुरीद हुए अफगानिस्तान और श्रीलंका, बोले-एक ही दिल है, कितनी बार जीतोगे प्रिय भारत
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भारत ने अफगानिस्तान को 73 टन मेडिकल और राहत सामग्री भेजी
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श्रीलंका के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 15 टन आपात सामग्री पहुँची
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सोशल मीडिया पर अफगान और श्रीलंकाई नागरिकों ने भारत की खुलकर तारीफ की
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पड़ोसियों के प्रति भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति फिर चर्चाओं में
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 30 नवंबर: भारतीय सरकार ने पड़ोसी देशों अफगानिस्तान और श्रीलंका की गंभीर मानवीय स्थितियों को देखते हुए बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेजी है। दोनों देशों में यह मदद आशा की किरण बनकर पहुँच रही है और दुनिया भर में भारत की मानवीय नीति की सराहना की जा रही है।
अफगानिस्तान को मिली 73 टन चिकित्सा सहायता
अफगानिस्तान के अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की भारी कमी को ध्यान में रखते हुए भारत ने 73 टन जीवनरक्षक मेडिकल सप्लाई भेजी है। इस खेप में कोविड-19 वैक्सीन, एंटी-वायरल दवाएँ, सर्जिकल उपकरण, अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाइयाँ और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल है।
यह मदद विशेष रूप से काबुल और कंधार के लिए भेजी गई है, जहाँ स्वास्थ्य ढांचा सबसे ज्यादा दबाव में है। पिछले चार वर्षों में भारत अफगानिस्तान को 50,000 टन गेहूँ, 400 टन से अधिक दवाइयाँ और कई वैक्सीन खेपें भेज चुका है।
एक अफगान नागरिक ने सोशल मीडिया पर लिखा,
“एक ही दिल है, कितनी बार जीतोगे प्रिय भारत
श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत की त्वरित प्रतिक्रिया
श्रीलंका पिछले कई दिनों से भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है। अब तक करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है और डेढ़ लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इस गंभीर स्थिति में भारतीय वायुसेना का C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान 15 टन से ज्यादा राहत सामग्री लेकर कोलंबो पहुँचा।
इस सहायता में टेंट, तारपोलीन, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, पानी शुद्ध करने की गोलियाँ और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थी।
भारत—हमेशा पड़ोसियों के साथ
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत हर मानवीय संकट में अपने पड़ोसियों के साथ खड़ा रहा है, चाहे भूकंप, सुनामी, महामारी या बाढ़ हो।
2022 के आर्थिक संकट में भी भारत ने श्रीलंका को 4 बिलियन डॉलर की सहायता दी थी।
यह हालिया मानवीय पहल भारत की सॉफ्ट पावर, विश्वसनीयता और पड़ोसी देशों के प्रति सामरिक प्रतिबद्धता को एक बार फिर सिद्ध करती है।