उत्तर प्रदेश फर्जी कफ सिरप रैकेट का किंगपिन कौन? बांग्लादेश तक सप्लाई का खुलासा
कोडीन युक्त कफ सिरप की करोड़ों की अवैध सप्लाई, वाराणसी-जौनपुर नेटवर्क पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, रैकेट का मास्टरमाइंड अब भी फरार
-
यूपी में फर्जी कफ सिरप रैकेट पर अब तक 40 एफआईआर दर्ज
-
आरोपी अमित टाटा गिरफ्तार, शुभम जयसवाल अब भी फरार
-
बिहार, झारखंड, बंगाल से होते हुए कफ सिरप की सप्लाई बांग्लादेश तक
-
100 करोड़ से अधिक के इस नेक्सस में कई सफेदपोशों के नाम की चर्चा
समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 29 नवंबर: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सक्रिय फर्जी कफ सिरप सिंडिकेट के पर्दाफाश के बाद नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। कोडीन युक्त कफ सिरप में भारी मिलावट की सूचना मिलने के बाद जब जांच शुरू हुई तो पूरे राज्य में फैले इस अवैध कारोबार की परतें खुलने लगीं। अब तक करीब 40 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जबकि एसटीएफ ने वाराणसी के रहने वाले अमित टाटा को गिरफ्तार किया है। वहीं, दूसरा मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क वाराणसी और जौनपुर के आसपास सक्रिय था और झारखंड की एक फर्म के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर फर्जी कफ सिरप की सप्लाई की जा रही थी। रांची की मेसर्स शैली ट्रेंड्स कंपनी से करीब 37 लाख बोतलों की सप्लाई दिखाई गई। इन कफ सिरप को 12 मेडिकल स्टोर्स के जरिए बेचा गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 57 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दिखाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल स्टोर्स के मालिक जौनपुर के हैं जबकि मुख्य आरोपी वाराणसी के। इसमें अमित सिंह टाटा और शुभम जयसवाल का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। इन दोनों के संबंध पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह से जुड़ने की चर्चा के बाद उनका नाम भी इस मामले में उछला। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद धनंजय सिंह ने सफाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी से सीबीआई जांच की मांग की है।
यह पूरा रैकेट केवल यूपी के पूर्वांचल तक सीमित नहीं था। यहां बनने वाला फर्जी कफ सिरप बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक भेजा जा रहा था, यानी दवा के नाम पर बच्चों और लोगों को जहर बेचा जा रहा था। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।
विपक्ष ने इसे 100 करोड़ से अधिक का सिंडिकेट बताते हुए सरकार पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस रैकेट से जुड़े कई सफेदपोश लोगों के नाम सामने आने की आशंका है।