नागालैंड का हॉर्नबिल उत्सव 2025: रंग, संस्कृति और वैश्विक मेल-जोल का संगम

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पूनम शर्मा
हर साल दिसंबर में नागालैंड की पहाड़ियाँ एक अनोखे रंग, धुन और उमंग से भर उठती हैं। पूरा राज्य एक सांस्कृतिक धड़कन बन जाता है, क्योंकि यहाँ  आयोजित होता है — हॉर्नबिल फेस्टिवल, जिसे ‘फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स’ भी कहा जाता है। 2025 का संस्करण और भी भव्य होने वाला है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ, विश्वस्तरीय संगीत प्रस्तुतियाँ और जीवंत आदिवासी प्रदर्शन शामिल होंगे। यह न सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत की पहचान, विरासत और आधुनिक वैश्विक पहुंच का प्रतीक भी बन चुका है।

नागालैंड की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव

1 से 10 दिसंबर तक कोहिमा से 12 किमी दूर नगा हेरिटेज विलेज, किसामा में यह 10-दिवसीय उत्सव आयोजित होगा। दिन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और रात में धमाकेदार म्यूजिक नाइट्स — यह संयोजन इसे एक अनोखा और पूर्ण अनुभव बनाता है। हॉर्नबिल उत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि नागालैंड की 17 प्रमुख जनजातियाँ एक ही मंच पर आती हैं।
इन जनजातियों के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, युद्धगीत, कथा-वाचन और पुरातन रीति-रिवाज न केवल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करते हैं, बल्कि उन्हें इस प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा से भी जोड़ते हैं।

नागालैंड, जो अक्सर मुख्यधारा मीडिया में सीमित रूप से दिखाया जाता है, वह इस उत्सव के माध्यम से भारत और दुनिया के सामने अपनी असली सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करता है। हॉर्नबिल उत्सव किसी संग्रहालय की तरह स्थिर नहीं, बल्कि जीवंत और धड़कता हुआ अनुभव है।

वैश्विक उपस्थिति और साझेदारी का विस्तार

2025 में पहली बार पाँच राष्ट्र — ऑस्ट्रिया, माल्टा, यूके, स्विट्जरलैंड और आयरलैंड — साझेदार देश के रूप में हिस्सा ले रहे हैं। यह सिर्फ एक सांस्कृतिक साझेदारी नहीं, बल्कि नागालैंड की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण है।
इन देशों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय कला, संगीत, पाक शैली और सांस्कृतिक संवाद का भी आदान-प्रदान होगा। यह संकेत है कि हॉर्नबिल अब सिर्फ उत्तर-पूर्व या राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि एक विश्व मंच बन गया है।

संगीत की रातें: परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम

नागालैंड हमेशा से अपनी म्यूज़िक कल्चर के लिए खास माना जाता है। 2025 की लाइन-अप इसे और भी खास बनाती है। स्कॉटलैंड, जापान, फ्रांस, आयरलैंड, दक्षिण कोरिया, इज़राइल, नेपाल और रूस जैसे देशों के कलाकार हर शाम मंच सजाएंगे।
रॉक, फोक-फ्यूज़न, इंडी, ईडीएम से लेकर ट्राइबल बीट्स तक — यह पूरा उत्सव संगीत प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा है। भारतीय बैंडों की भागीदारी इसे और विविध बनाती है, जिससे यह मंच परंपरा और आधुनिकता दोनों को एक साथ पिरो देता है।

नगा पाक-परंपरा और हस्तकला की दुनिया

हॉर्नबिल त्योहार का अनुभव केवल देखने और सुनने तक सीमित नहीं, बल्कि स्वाद और स्पर्श के स्तर पर भी अविस्मरणीय है।
यहाँ पर्यटक स्मोक्ड मीट, बांस के व्यंजन, छोटे अनाज (मिलेट) आधारित पकवान और कई पारंपरिक नगा खाद्य पदार्थों का आनंद ले सकते हैं। साथ ही बाजारों में हैंडवोवन शॉल, बांस उत्पाद, लोक आभूषण, जैविक उत्पाद और कई स्थानीय वस्तुएं आकर्षित करती हैं।
स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण का यह एक बड़ा माध्यम बन चुका है जहां कारीगरों, किसानों और महिलाओं का हुनर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुँचता है।

किसामा और कोहिमा की जगमगाती रातें

उत्सव के दौरान कोहिमा की रातें अपनी ही एक अलग कहानी कहती हैं। नाइट बाज़ार, रंगीन स्ट्रीट इंस्टॉलेशंस, फ्यूज़न फूड स्टॉल, लाइव आर्ट और स्थानीय कलाकारों की रचनाएँ शहर को एक शहरी-सांस्कृतिक कैनवास में बदल देती हैं।
यह माहौल फोटोग्राफी प्रेमियों और संस्कृति खोजने वालों के लिए बेहद अनोखा अनुभव देता है।

पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी

डिमापुर हवाई अड्डा (कोहिमा से 70 किमी) और डिमापुर रेलवे स्टेशन इस उत्सव तक पहुँचने के मुख्य मार्ग हैं। इनके माध्यम से भारत के बड़े शहरों—गुवाहाटी, कोलकाता, दिल्ली आदि—से पहुंचना काफी आसान है।

निष्कर्ष: परंपरा, पर्यटन और वैश्विक पहचान का अनूठा सेतु

हॉर्नबिल फेस्टिवल 2025 केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि नागालैंड के आत्मसम्मान, सामुदायिक एकता और वैश्विक पहुंच का उत्सव है। यह वह अवसर है जहां पहाड़, परंपराएँ, जनजातीय कथाएँ, आधुनिक बीट्स और अंतरराष्ट्रीय संबंध—all blend into one living celebration.
यह भारत की अद्भुत सांस्कृतिक विविधता का सशक्त प्रमाण है — और साथ ही यह संदेश भी देता है कि उत्तर-पूर्व भारत दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर अब मजबूती से उभर चुका है।

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