बिहार कैबिनेट विस्तार जल्द, JDU कोटे से 6 मंत्री पद भरने की तैयारी

नीतीश कुमार की 10वीं सरकार में मंत्रिमंडल के 9 पद रिक्त, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए अगले माह विस्तार की संभावना

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  • रिक्त पद: बिहार कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं, जबकि वर्तमान में केवल 27 मंत्रियों ने शपथ ली है, जिससे 9 पद खाली हैं।
  • JDU का कोटा: तय फॉर्मूले के अनुसार, JDU के कोटे में सबसे ज्यादा 6 मंत्री पद अभी भी खाली हैं।
  • रणनीति: जेडीयू और एनडीए नेतृत्व इस विस्तार के माध्यम से विधानसभा चुनाव के बाद छूटे हुए जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति बना रहा है।

समग्र समाचार सेवा
पटना, 29 नवंबर: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल के दूसरे चरण के विस्तार की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, अगले महीने यानी दिसंबर 2025 में यह महत्वपूर्ण विस्तार होने की प्रबल संभावना है। इस विस्तार का मुख्य फोकस रिक्त पड़े 9 मंत्री पदों को भरना होगा, जिनमें अकेले जनता दल (यूनाइटेड) JDU कोटे के सर्वाधिक 6 पद शामिल हैं।

क्यों जरूरी है कैबिनेट का विस्तार?

बिहार विधानसभा में सदस्यों की संख्या के 15% के नियम के अनुसार, मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस प्रकार, मंत्रिमंडल में अभी भी 9 पद रिक्त हैं।

एनडीए गठबंधन में सीटों के बंटवारे के तय मापदंडों के अनुसार, इन 9 खाली पदों का विभाजन इस प्रकार है:

पार्टी                                           कुल आवंटित कोटा          वर्तमान मंत्री            रिक्त पद
जनता दल (यूनाइटेड) JDU                     15                               9                          6
भारतीय जनता पार्टी (BJP)                      16                             14                           2
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास)           3                               2                            1
कुल रिक्त पद                                             –                                –                           9

स्पष्ट है कि बिहार मंत्रिमंडल विस्तार जेडीयू के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसे अपने कोटे के सबसे ज्यादा 6 पदों को भरना है। इन पदों के भरने से न केवल सरकार का कार्यभार हल्का होगा, बल्कि पार्टी के अंदर विधायक भी संतुष्ट होंगे।

विस्तार के पीछे की राजनीतिक मजबूरी

मंत्रिमंडल विस्तार में देरी का मुख्य कारण पहले विधानसभा सत्र (जो 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है) पर ध्यान केंद्रित करना और एनडीए घटक दलों के बीच अंतिम नामों पर सहमति बनाना था। अब, जदयू के लिए अपने 6 मंत्रियों को शामिल करना निम्नलिखित कारणों से राजनीतिक रूप से अनिवार्य हो गया है:

जातीय संतुलन: JDU अपने कोटे से विभिन्न जातियों, खासकर अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलितों में से उन प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहती है, जिन्हें पहले चरण में जगह नहीं मिल पाई थी।

क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: नए मंत्रियों के जरिए राज्य के उन क्षेत्रों और जिलों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, जहां विधानसभा चुनाव में JDU को मजबूत समर्थन मिला था या जहां असंतोष को दूर करने की आवश्यकता है।

संगठन और अनुभव: नीतीश कुमार आमतौर पर अनुभवी नेताओं को पसंद करते हैं। ऐसे में, कुछ पुराने या वरिष्ठ विधायकों को मौका दिया जा सकता है, जो संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं।

संभावित नाम और प्रक्रिया

हालांकि, JDU कोटे से मंत्री बनने वाले 6 संभावित नामों को लेकर पार्टी नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन पार्टी में कई वरिष्ठ और युवा विधायक मंत्री पद की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस विस्तार में नए चेहरों के साथ-साथ जातीय समीकरणों के आधार पर कुछ महिलाओं को भी शामिल किए जाने की संभावना है।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता हैं, जल्द ही उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा तथा अन्य गठबंधन सहयोगियों से चर्चा पूरी करेंगे। चूंकि विधानसभा सत्र दिसंबर के पहले सप्ताह में समाप्त हो रहा है, इसलिए दिसंबर के मध्य या तीसरे सप्ताह में यह मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। यह विस्तार 2026 के स्थानीय चुनावों और आगामी वर्षों के लिए JDU की राजनीतिक पिच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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