असम में बहुविवाह पर बैन, विधानसभा में विधेयक पारित

हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने किया बड़ा फैसला, अब एक से अधिक शादी करना होगा अवैध; उल्लंघन पर सख्त सजा

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  • कानूनी प्रतिबंध: असम विधानसभा ने बहुविवाह (Polygamy) को प्रतिबंधित करने वाला विधेयक पारित कर दिया है।
  • अवैध विवाह: विधेयक के प्रावधानों के तहत, पहली पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरी शादी करना अब पूरी तरह से अवैध माना जाएगा।
  • संवैधानिक छूट: संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत आने वाले स्वायत्त आदिवासी क्षेत्रों को इस कानून से छूट दी गई है।

समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 28 नवंबर: महिलाओं के सम्मान और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, असम विधानसभा ने बहुविवाह (Polygamy) को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने वाला एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए यह कानून बनाया है, जिसका उद्देश्य राज्य में ‘एक पुरुष एक पत्नी’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करना है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान और उद्देश्य

असम सरकार द्वारा पारित इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और समाज में समानता लाना है।

1. विवाह को अवैध घोषित करना

कानून बनने के बाद, यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के कानूनी रूप से तलाक दिए बिना या उसके निधन के बिना दूसरी शादी करता है, तो वह विवाह तत्काल अवैध (Void) माना जाएगा। यह प्रावधान उन विवाहों पर लागू होगा जो मौजूदा किसी भी व्यक्तिगत कानून या धार्मिक प्रथा के तहत होते हों, बशर्ते वह छठी अनुसूची के तहत न आता हो।

2. कठोर सजा का प्रावधान

बहुविवाह करने वालों के लिए विधेयक में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। कानून का उल्लंघन करने वाले पुरुषों और इसमें सहयोग करने वाले पुरोहितों या गवाहों को भी जेल की सजा और भारी जुर्माना दोनों हो सकता है। सरकार का मानना है कि सख्त सजा ही इस कुप्रथा को समाप्त करने का एकमात्र तरीका है।

3. महिला सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “महिलाओं के सम्मान के बिना समाज प्रगति नहीं कर सकता, और बहुविवाह महिलाओं के मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।”

छठी अनुसूची क्षेत्र को क्यों मिली छूट?

विधेयक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह संविधान की छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा। इन क्षेत्रों में बोडोलैंड, कार्बी आंगलोंग, दीमा हसाओ आदि शामिल हैं, जिन्हें अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रथागत कानूनों की रक्षा के लिए स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils) के माध्यम से विशेष संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।

इस संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया कि इन आदिवासी क्षेत्रों के अपने मजबूत सामुदायिक और प्रथागत कानून हैं, जिनमें से कुछ में बहुविवाह की प्रथाएं सांस्कृतिक रूप से जुड़ी हुई हैं। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप या समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे व्यापक राष्ट्रीय कानून के बिना, राज्य सरकार सीधे इन प्रथागत कानूनों को निरस्त नहीं कर सकती है। इसलिए, विधेयक का क्रियान्वयन इन क्षेत्रों को छोड़कर पूरे असम पर लागू होगा।

UCC की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

असम में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के इस कदम को केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा देश भर में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्रयास माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने पहले ही कहा था कि यह विधेयक असम को UCC की ओर ले जाएगा। इस कानून के पारित होने से अन्य भाजपा शासित राज्यों पर भी अपने-अपने राज्यों में बहुविवाह को नियंत्रित करने या UCC की ओर बढ़ने का दबाव बढ़ेगा। यह कानून असम में सामाजिक सुधार के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।

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