ब्लास्ट से पहले पैसों के लिए छटपटाहट

हमले से कुछ हफ्ते पहले डॉ. अदील बार-बार एडवांस सैलरी मांगता रहा; जांच एजेंसियां मान रहीं—आर्थिक संकट का सीधा लिंक आतंकी फंडिंग से हो सकता है।

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  • फॉरेंसिक टीमों ने मोबाइल से डिलीटेड चैट्स रिकवर कीं, जिनमें अदील बार-बार एडवांस सैलरी मांगता दिखा।
  • 5 से 9 सितंबर तक की चैट्स में “बहुत ज़रूरी पैसे” की मांग, जांच एजेंसियों को फंडिंग पर संदेह।
  • NIA के मुताबिक ब्लास्ट की साजिश के लिए ₹26 लाख जुटे, जिनमें अदील ने लगभग ₹8 लाख दिए।
  • मुख्य बम प्लांटर उमर उन नबी को पनाह देने वाले सोयब को भी गिरफ्तार किया गया, कुल गिरफ्तारियां 7 हुईं।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 नवंबर: लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए भीषण कार ब्लास्ट की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा रिकवर की गई डिलीटेड व्हाट्सऐप चैट्स से पता चलता है कि आतंकी आरोपी डॉ. अदील अहमद राथर हमले से कुछ ही हफ्ते पहले गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। चैट्स में वह बार-बार अपनी सैलरी का एडवांस भुगतान मांगता नजर आता है।

जांच से जुड़े मीडिया सूत्रों के अनुसार, 5, 6, 7 और 9 सितंबर की ये चैट्स अदील की बेचैनी और पैसों की सख्त जरूरत को साफ दिखाती हैं। एक चैट में वह सीधे लिखता है कि वह “बहुत ज़रूरी पैसे की जरूरत” में है। NIA अब यह जांच कर रही है कि क्या यही पैसों की हड़बड़ी आतंकी साजिश की फंडिंग का हिस्सा थी।

NIA के मुताबिक, ब्लास्ट की साजिश को अंजाम देने के लिए ₹26 लाख इकट्ठे किए गए थे, जिनमें से ₹8 लाख अदील द्वारा दिए जाने का संदेह है। इससे एजेंसियों को शक है कि अदील की आर्थिक ‘डिस्परेटनेस’ सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि ऑपरेशनल फंडिंग से भी जुड़ी हो सकती है।

इस बीच, NIA ने एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की है। हरियाणा के फरीदाबाद (धौज) निवासी सोयब को मुख्य बम प्लांटर डॉ. उमर उन नबी को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी का कहना है कि सोयब ने उमर को रहने की जगह और लॉजिस्टिक सपोर्ट दोनों दिए थे। यह मामले में सातवीं गिरफ्तारी है।

अब तक NIA निम्नलिखित 6 मुख्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है:

1. डॉ. मुझम्मिल शकील गनई

2. डॉ. अदील अहमद राथर

3. डॉ. शाहीन सईद

4. मुफ़्ती इरफ़ान अहमद वाग़े

5. अमीर राशिद अली (ब्लास्ट में इस्तेमाल कार का मालिक)

6. जासिर बिलाल वानी (तकनीकी सहयोगकर्ता)

जांच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। 73 से अधिक गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।

जांचकर्ताओं ने मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी की दूसरी कार भी जब्त की है, जो अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर और पुलवामा निवासी है। NIA को उम्मीद है कि यह वाहन उनकी मूवमेंट और साजिश की योजना से जुड़े और सबूत देगा।

10 नवंबर का यह ब्लास्ट, जिसमें 15 लोगों की मौत और 24 से ज्यादा घायल हुए थे, अब एक सुसंगठित नेटवर्क, मजबूत फंडिंग और योजनाबद्ध ऑपरेशन का नतीजा माना जा रहा है। रिकवर हुई व्हाट्सऐप चैट्स जांचकर्ताओं के लिए हमले की पूरी टाइमलाइन और फंडिंग स्ट्रक्चर समझने में अहम कड़ी बन गई हैं।

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