- चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश की महिला को एयरपोर्ट पर रोकने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
- विदेश मंत्रालय ने इसे अनावश्यक और अस्वीकार्य बताकर तुरंत स्पष्टीकरण मांगा।
- दुनिया भर में इस घटना से भारत-चीन संबंधों में तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
- भारत का चीन को सख्त संदेश — ‘यह अस्वीकार्य’
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 नवंबर: भारत ने चीन द्वारा एक अरुणाचल प्रदेश की भारतीय महिला नागरिक को एयरपोर्ट पर रोकने की घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यह घटना चीन के एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई, जहां यात्रियों की दस्तावेज़ जांच के दौरान चीनी अधिकारियों ने महिला को रोका और अतिरिक्त पूछताछ की।
विदेश मंत्रालय ने इसे “अनुचित, अनावश्यक और बिल्कुल अस्वीकार्य” बताते हुए बीजिंग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। भारतीय सरकार का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है, और इस तरह की कार्रवाई भारत की संप्रभुता के प्रति असम्मान दिखाती है।
तनाव बढ़ा, दुनिया की नजर भारत-चीन रिश्तों पर
भारत और चीन के बीच यह ताज़ा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमाई तनाव और राजनयिक मतभेद मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञों ने इस घटना को दक्षिण एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का संकेत बताया है।
चीन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया—’भारतीय नागरिकों के साथ कोई भेदभाव स्वीकार नहीं’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि:
भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा से समझौता नहीं करेगा।
चीनी अधिकारियों को इस घटना पर त्वरित स्पष्टीकरण देना चाहिए।
भारत ने बीजिंग स्थित दूतावास के माध्यम से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
सरकार का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल से जुड़े नागरिकों या दस्तावेजों को लेकर विवादित रवैया अपनाया है।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे फिर चर्चा में
चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ बताता रहा है, जबकि भारत इसे अपने पूर्वोत्तर राज्य के रूप में पूरी तरह नियंत्रित करता है।
इस घटना से फिर यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से चर्चा में आ गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि—
भारत लगातार अपने मजबूत कूटनीतिक रुख पर कायम है
चीन की ऐसी चालें क्षेत्रीय दबाव बनाने की कोशिश हो सकती हैं
लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत को मजबूत समर्थन मिल रहा है
घटना का राजनयिक असर—बढ़ सकती हैं दोनों देशों के बीच चर्चाएँ
यह मामला न केवल नागरिक अधिकारों का विषय है, बल्कि दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारत इस मुद्दे को उच्च-स्तरीय वार्ताओं में उठाएगा और चीन को अपने व्यवहार में बदलाव के लिए मजबूर करेगा।
निष्कर्ष: तनाव के बीच भारत का स्पष्ट संदेश
अरुणाचल की महिला को रोकने की घटना ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों में संवेदनशीलता को उजागर किया है।
भारत ने अपने रुख को स्पष्ट किया है—कि वह अपने नागरिकों की गरिमा और क्षेत्रीय संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।