संदेशखाली में ‘SIR’ का असर: ग्रामीणों ने की कई बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान
मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) के दौरान स्थानीय लोगों ने उजागर किए नाम, फर्जी दस्तावेजों का दावा।
- सत्यापन अभियान: पश्चिम बंगाल में चल रहे ‘SIR’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत घर-घर सत्यापन जारी है।
- ग्रामीणों का दावा: संदेशखाली के निवासियों ने सर्वे के दौरान कई अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को चिन्हित किया है।
- फर्जी दस्तावेज: आरोप है कि इन लोगों ने दलालों के जरिए फर्जी वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाए थे।
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता/संदेशखाली, 26 नवंबर: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। उत्तर 24 परगना जिले के चर्चित क्षेत्र संदेशखाली में इस अभियान के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहाँ स्थानीय निवासियों ने खुद आगे आकर कई ऐसे लोगों की पहचान की है जो कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक हैं और अवैध रूप से यहाँ रह रहे हैं।
ग्रामीणों ने खोली पोल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) संदेशखाली के विभिन्न गांवों में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे थे, तब स्थानीय ग्रामीणों ने कई संदिग्ध परिवारों की ओर इशारा किया। ग्रामीणों का दावा है कि ये लोग मूल रूप से बांग्लादेश के निवासी हैं और पिछले कुछ वर्षों में अवैध तरीके से सीमा पार कर यहाँ बस गए हैं।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि इनमें से कई लोगों ने स्थानीय दलालों की मदद से राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय दस्तावेज बनवा लिए हैं। ‘SIR’ सर्वे की सख्ती और पुराने दस्तावेजों की मांग ने अब इन अवैध प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
फर्जी दस्तावेजों का खेल
संदेशखाली के निवासियों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन बाहरी लोगों को आसानी से भारतीय नागरिकता के दस्तावेज मिल गए। अब जब चुनाव आयोग ने 1987 से पहले के दस्तावेज या वंश वृक्ष (Family Tree) का प्रमाण मांगना शुरू किया है, तो इन अवैध नागरिकों के पास दिखाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है, “हम सालों से कह रहे थे कि बाहर के लोग यहाँ आकर हमारे हक मार रहे हैं, लेकिन अब SIR के कारण सच सामने आ रहा है।” कई जगहों पर ग्रामीणों ने BLO को उन विशिष्ट घरों की सूची भी दी है जहाँ कथित बांग्लादेशी रह रहे हैं।
प्रशासन सतर्क, जांच तेज
ग्रामीणों द्वारा की गई इस पहचान के बाद स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारी सतर्क हो गए हैं। संदिग्ध पाए गए नामों को विशेष जांच सूची में डाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और यदि कोई अवैध नागरिक पाया जाता है, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में ‘SIR’ के डर से सीमावर्ती इलाकों में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (उलटा पलायन) भी देखा गया है, जहाँ कई अवैध प्रवासी वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं। संदेशखाली की यह घटना इस पूरे अभियान की गंभीरता और स्थानीय लोगों की जागरूकता को दर्शाती है।