EC को बदनाम कर रहे राहुल गांधी और विपक्ष, जज और ब्यूरोक्रेट्स समेत 272 हस्तियों ने लिखा खुला पत्र
‘जहरीली राजनीति से लोकतंत्र को खतरा’, दिग्गजों का कड़ा संदेश — ‘वोट चोरी से लेकर बी-टीम तक, हर आरोप बिना सबूत’
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272 दिग्गजों का खुला पत्र—16 पूर्व जज, 123 पूर्व नौकरशाह, 14 पूर्व राजदूत और 133 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल
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विपक्ष पर आरोप—बिना सबूत के ECI पर हमले, न कोई शिकायत दर्ज, न हलफनामा
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राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और ‘एटम बम’ वाले बयान को बताया दबाव बनाने की रणनीति
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दिग्गजों का कहना—SIR प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में, पारदर्शिता पूरी; फर्जी वोटर हटाना लोकतंत्र के हित में
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 नवंबर: चुनाव आयोग को लेकर हाल के दिनों में बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच देश के 272 पूर्व उच्च पदस्थ अधिकारियों ने एक विस्तृत खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल व्यवस्थित रूप से चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने का अभियान चला रहे हैं। इस समूह में 16 पूर्व न्यायाधीश, 123 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट, 14 पूर्व राजदूत और 133 पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हैं।
दिग्गजों के अनुसार विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग को ‘बीजेपी की बी-टीम’ कहने से लेकर ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप लगाना केवल राजनीतिक अवसरवाद है, जबकि प्रमाण के नाम पर अब तक न कोई औपचारिक शिकायत दाखिल हुई है और न कोई हलफनामा।
राहुल गांधी पर सीधा निशाना
पत्र में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का विशेष उल्लेख किया गया है। उन्होंने हाल में चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए इसे ‘एटम बम जैसा खुलासा’ बताया था। पूर्व अधिकारियों ने इस बयान को “आयोग के अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश” बताया है।
दोहरे मानदंड पर सवाल
पत्र में कहा गया कि जब विपक्ष के पक्ष में चुनावी नतीजे आते हैं, तब वे चुनाव आयोग की तारीफ करते हैं, लेकिन प्रतिकूल परिणाम मिलते ही वही संस्था अचानक ‘संदिग्ध’ बताई जाने लगती है। दिग्गजों ने इसे “सेलेक्टिव आक्रोश और राजनीतिक हताशा” करार दिया है।
SIR प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण
दिग्गजों ने साफ कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की सफाई (SIR) पूरी पारदर्शिता के साथ की है—न्यायालय की निगरानी में सत्यापन, फर्जी मतदाताओं की पहचान और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह खुली और कानूनी दायरे में की गई है।
उनके अनुसार, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी नागरिकता आधारित मतदाता सूची ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव मानी जाती है। ऐसे में भारत में फर्जी या अपात्र नाम हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
चुनाव आयोग के लिए सलाह और राजनीतिक दलों को संदेश
272 हस्तियों ने आयोग से पारदर्शिता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर कानूनी उपाय अपनाकर अपनी साख की रक्षा करने की सलाह दी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे बिना ठोस सबूत के आरोप लगाने के बजाय नीतिगत विकल्प पेश करें और लोकतांत्रिक फैसलों को स्वीकार करने की परिपक्वता दिखाएं।