अमेरिका-सऊदी में ऐतिहासिक परमाणु समझौता, F-35 डील

क्राउन प्रिंस MBS से मिले ट्रंप, वाइट हाउस ने दी F-35 लड़ाकू जेट की बिक्री को मंजूरी।

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  • अमेरिका और सऊदी अरब ने परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो मजबूत अप्रसार मानकों पर आधारित है।
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ वाइट हाउस में मुलाकात के दौरान F-35 फाइटर जेट सहित एक बड़े रक्षा बिक्री पैकेज को मंजूरी दी।
  • इस समझौते से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी, अमेरिकी श्रमिकों के लिए अवसर बढ़ेंगे और मध्य पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा को बल मिलेगा।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 नवंबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच वॉशिंगटन में हुई हालिया मुलाकात ने दोनों देशों के 80 साल से अधिक पुराने संबंधों को एक नई दिशा दी है। मंगलवार को वाइट हाउस में हुई इस बैठक के दौरान, दोनों देशों ने कई प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें परमाणिक ऊर्जा सहयोग और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों की बिक्री शामिल है। इस डील को मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है।

वॉइट हाउस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणा को मंजूरी दी है। यह समझौता दशकों पुरानी, कई अरब डॉलर की परमाणु ऊर्जा साझेदारी के लिए कानूनी आधार तैयार करेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सहयोग मजबूत अप्रसार मानकों (Non-Proliferation Standards) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक सकारात्मक कदम है। इस समझौते से सऊदी अरब को परमाणु ऊर्जा के माध्यम से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

रक्षा क्षेत्र में बड़ा रणनीतिक कदम

इस बैठक का सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू रक्षा बिक्री पैकेज रहा, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने मंजूरी दी है। इस पैकेज के तहत, सऊदी अरब को भविष्य में पाँचवीं पीढ़ी के उन्नत अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी शामिल है। F-35 दुनिया के सबसे अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू जेट में से एक है। इसकी बिक्री को मंजूरी देना इस क्षेत्र में अमेरिका की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि परंपरागत रूप से अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षात्मक बढ़त को बनाए रखने के लिए ऐसी उन्नत तकनीक अरब देशों को बेचने से परहेज किया है।

F-35 के अलावा, रक्षा पैकेज में लगभग 300 अमेरिकी टैंक की डिलीवरी भी शामिल है। वॉइट हाउस ने इस व्यापक रक्षा पैकेज को अमेरिका-सऊदी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने और पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा को मजबूत करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह बिक्री अमेरिकी औद्योगिक आधार को भी समर्थन देगी और अच्छे वेतन वाली नौकरियों के अवसर पैदा करेगी।

आर्थिक, तकनीकी और AI सहयोग

रक्षा और परमाणु ऊर्जा के अलावा, दोनों देशों ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी गहरा करने के लिए कई समझौते किए हैं।

आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण (Supply Chain Diversification): आवश्यक खनिजों पर एक महत्वपूर्ण फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समझौता: दोनों देशों ने एक AI समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता सऊदी अरब को अमेरिकी सिस्टम तक पहुँच देगा, जबकि अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

निवेश: सऊदी क्राउन प्रिंस ने संकेत दिया है कि रियाद अपने घोषित 600 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक कर सकता है।

ये समझौते अमेरिका-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने, अमेरिकी श्रमिकों के लिए अधिक अवसर पैदा करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को अभूतपूर्व तरीके से मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह समझौता मध्य पूर्व में ईरान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और अमेरिका के हितों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

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