बांग्लादेश ICT ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा सुनाई
छात्र प्रदर्शनों पर हिंसक दमन, हेलीकॉप्टर अटैक और साजिश रचने के आरोप साबित; 400 पन्नों में ट्रिब्यूनल का विस्तृत फैसला
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तीन जजों की ICT ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया।
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फैसले में कथित हेलीकॉप्टर फायरिंग, गोलियों से हुई दर्जनों मौतों और सुरक्षा बलों द्वारा यातना के आदेशों का ज़िक्र।
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1,400 से अधिक नागरिकों की मौत और 11,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी का संदर्भ, डॉक्टरों पर रिपोर्ट बदलने का दबाव भी उजागर।
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ढाका में फैसले से पहले तनाव बढ़ा; पुलिस को हिंसक स्थिति में सीधे गोली चलाने के आदेश
समग्र समाचार सेवा
ढाका, 17 नवंबर: बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल लाने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने 400 पन्नों में तैयार किए गए इस फैसले को छह हिस्सों में सुनाया, जिसमें वर्षों से चली आ रही सुनवाई और सैकड़ों गवाहियों की विस्तृत समीक्षा शामिल है।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान जिस स्तर की हिंसा हुई, वह किसी आकस्मिक स्थिति का परिणाम नहीं बल्कि राजनीतिक नेतृत्व द्वारा की गई सुनियोजित साजिश थी। अदालत के अनुसार, शेख हसीना और उनके सहयोगियों ने सुरक्षा बलों को ‘किसी भी कीमत पर आंदोलन कुचलने’ का आदेश दिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जान गई।
फैसले में यह भी खुलासा हुआ कि कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों पर हेलीकॉप्टर से गोलियाँ चलाने और बम गिराने के निर्देश दिए गए। सुरक्षाबलों द्वारा इस्तेमाल की गई धातु के छर्रों वाली घातक गोलियों ने दर्जनों छात्रों की मौके पर ही जान ले ली। अदालत ने उन वीडियो और सबूतों का भी हवाला दिया जिन्हें जांच एजेंसियों ने जमा किया था—कई वीडियो में घायल प्रदर्शनकारियों को मदद के लिए चिल्लाते देखा गया, लेकिन अस्पतालों को उन्हें भर्ती करने से रोक दिया गया था।
डॉक्टरों की गवाही ने ट्रिब्यूनल को बताया कि कई अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश मिले थे कि प्रदर्शनकारियों का इलाज न करें। कुछ डॉक्टरों पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने का दबाव भी बनाया गया। ICT ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि राजनीतिक मंशा से की गई इन कार्रवाइयों में सेना, पुलिस और RAB यूनिट्स शामिल थीं।
ट्रिब्यूनल ने इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून को भी सह-आरोपी माना। अदालत के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर हिंसक दमन की रणनीति बनाई और प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी घोषित करने का प्रयास किया।
फैसले से ठीक पहले शेख हसीना ने अपने समर्थकों को एक वीडियो संदेश भेजकर कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप ‘राजनीतिक साजिश’ हैं और उन्हें फैसले की परवाह नहीं है। हालांकि देश में फैसले से पहले ही तनाव बढ़ चुका था, और राजधानी ढाका में पुलिस को हिंसक परिस्थितियों में सीधे गोली चलाने के आदेश जारी किए गए थे।