रोहिणी आचार्य मामले में महिला आयोग करेगा मदद
घरेलू विवाद के बाद बिहार की बेटी रोहिणी आचार्य को न्याय दिलाने के लिए आयोग का बड़ा कदम
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य से जुड़े पारिवारिक विवाद के मामले में महिला आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
- आयोग ने रोहिणी आचार्य को ‘बिहार की बेटी’ बताते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें हर संभव कानूनी व परामर्श संबंधी मदद देने का आश्वासन दिया है।
- यह विवाद तब सार्वजनिक रूप से चर्चा में आया जब RJD के एक वरिष्ठ नेता ने लालू परिवार पर अपनी बेटी का समर्थन न करने को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
समग्र समाचार सेवा
पटना, 17 नवंबर: बिहार की राजनीति और मीडिया गलियारों में इन दिनों लालू प्रसाद यादव की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य से जुड़ा घरेलू विवाद सुर्खियों में है। इस संवेदनशील मामले में अब महिला आयोग ने हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है। आयोग ने रोहिणी आचार्य को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जो उनकी पारिवारिक समस्याओं के बीच उन्हें समर्थन प्रदान करेगा।
यह मामला उस वक्त तूल पकड़ गया था, जब RJD के ही एक वरिष्ठ और करीबी नेता ने सार्वजनिक तौर पर यह सवाल उठाया था कि लालू यादव और राबड़ी देवी अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के समर्थन में क्यों नहीं आए। खबरों के अनुसार, रोहिणी आचार्य ने अपने ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और अपमान का आरोप लगाया था और कहा था कि उन्हें रोते हुए अपने पति के घर से बाहर निकलना पड़ा। इस सार्वजनिक आलोचना के बाद, महिला आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है।
‘बिहार की बेटी’ को न्याय दिलाने की पहल
महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह मामला देश के एक बड़े राजनीतिक परिवार से जुड़ा हो, लेकिन यह मूल रूप से एक महिला के सम्मान और अधिकारों का मामला है। आयोग ने रोहिणी आचार्य को ‘बिहार की बेटी’ बताते हुए कहा कि किसी भी महिला के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि की हो।
आयोग ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि वह उनकी शिकायत की तह तक जाएगा और यदि आवश्यक हुआ तो कानूनी प्रक्रिया में उनका साथ देगा। आयोग की टीम इस मामले से जुड़ी सभी जानकारियों को इकट्ठा कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें तत्काल न्याय मिल सके और उन्हें उनकी गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त हो।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
यह पूरा घटनाक्रम RJD और लालू परिवार के लिए एक राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बन गया है। एक तरफ जहां RJD सामाजिक न्याय की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ परिवार की बेटी को घरेलू विवाद में न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। RJD के वरिष्ठ नेताओं द्वारा ही सवाल उठाए जाने के बाद, यह मामला पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आयोग का यह हस्तक्षेप न केवल रोहिणी आचार्य को व्यक्तिगत रूप से मदद देगा, बल्कि यह समाज में एक मजबूत संदेश भी देगा कि घरेलू हिंसा और विवादों में महिलाएं अकेली नहीं हैं, और आयोग ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों में भी बिना किसी दबाव के अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम महिला सशक्तिकरण और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि न्यायपालिका और आयोग सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।