बिहार जीत के बाद भाजपा का बड़ा एक्शन: आरके सिंह निष्कासित

पूर्व केंद्रीय मंत्री को 6 साल के लिए किया गया बाहर; चुनाव के दौरान सम्राट चौधरी को वोट न देने की अपील थी मुख्य वजह

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  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की शानदार जीत के ठीक बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
  • आरा से सांसद आरके सिंह पर चुनाव के दौरान पार्टी के नेताओं पर सवाल उठाने और दागदार उम्मीदवारों को टिकट देने पर आपत्ति जताने का आरोप है।
  • इस कार्रवाई को चुनाव के तुरंत बाद BJP के ‘सफाई अभियान’ के तौर पर देखा जा रहा है, जो पार्टी के भीतर अनुशासन के सख्त संदेश को दर्शाता है।

समग्र समाचार सेवा
पटना, 15 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की प्रचंड जीत के एक दिन बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन में अनुशासनहीनता को लेकर एक बड़ा और कठोर कदम उठाया है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई, चुनाव के दौरान आरके सिंह द्वारा लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियाँ किए जाने के आरोप में की गई है।

आरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद आरके सिंह, जो नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री भी रह चुके हैं, लंबे समय से पार्टी की मुख्यधारा की गतिविधियों से दूर चल रहे थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, निष्कासन की यह कार्रवाई जानबूझकर चुनाव परिणामों के बाद की गई, ताकि महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की अंदरूनी कलह या विवाद से बचा जा सके।

सम्राट चौधरी के खिलाफ अपील बनी बड़ी वजह

आरके सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है उनका सार्वजनिक रूप से पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करना। चुनाव प्रचार के दौरान, आरके सिंह ने पार्टी के एक प्रमुख नेता सम्राट चौधरी को तारापुर विधानसभा क्षेत्र से वोट न देने की अपील की थी। यह सीधा आह्वान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ एक बड़ा कदम माना गया।

इसके अतिरिक्त, आरके सिंह ने NDA गठबंधन द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं, जैसे कि अनंत सिंह और विभा देवी को टिकट दिए जाने पर भी खुले तौर पर सवाल उठाए थे। इन सार्वजनिक बयानों ने चुनाव के माहौल में गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा की थी।

चुनावी रैलियों से दूरी और पार्टी विरोधी तेवर

सिर्फ बयानबाजी ही नहीं, बल्कि आरके सिंह ने शाहाबाद क्षेत्र (आरा उनका संसदीय क्षेत्र इसी क्षेत्र में आता है) में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित BJP के अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुनावी रैलियों से भी लगातार दूरी बनाए रखी थी। यह उनकी बढ़ती असक्रियता और पार्टी के प्रति बगावती तेवर को दर्शाता है।

पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा थी कि आरके सिंह के मन में असंतोष है, लेकिन BJP नेतृत्व ने चुनाव समाप्त होने तक धैर्य बनाए रखा। परिणाम आने के तुरंत बाद की गई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि जीत के बावजूद, पार्टी के भीतर अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, भले ही वह नेता कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो।

BJP के इस ‘सफाई अभियान’ को संगठन के भीतर एकता और सख्ती सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है, ताकि बिहार में मिली ऐतिहासिक जीत की नींव पर भविष्य की मजबूत रणनीति बनाई जा सके। आरके सिंह के निष्कासन से बिहार BJP में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, जिसे भरने के लिए अब नए नेताओं को अवसर मिल सकता है।

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