प्रधानमंत्री मोदी ने किया छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन

नई राजधानी अटल नगर में 51 एकड़ में फैला आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल सदन; अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का भी अनावरण

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  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अटल नगर, नया रायपुर में नए विधानसभा भवन का उद्घाटन किया।
  • 324 करोड़ की लागत से बना यह भवन परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम है।
  • भवन की छत पर धान की बालियों की नक्काशी और बस्तर के शिल्पियों की काष्ठकला इसकी खासियत है।
  • 200 सदस्यों के विस्तार योग्य सदन में सौर ऊर्जा संयंत्र और वर्षा जल संचयन की भी व्यवस्था।

समग्र समाचार सेवा 
रायपुर, 1 नवंबर:छत्तीसगढ़ की विधानसभा यात्रा, जो राज्य निर्माण के समय रायपुर के एक निजी विद्यालय के हॉल से शुरू हुई थी, अब 25 वर्षों बाद एक आधुनिक और भव्य परिसर में पहुँच गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अटल नगर (नया रायपुर) में 51 एकड़ में फैले नए विधानसभा भवन का उद्घाटन किया और इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

अधिकारियों के अनुसार, 324 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह भवन पर्यावरण-अनुकूल, ऊर्जा-कुशल और पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसे “छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और प्रगतिशील भावना का प्रतीक” बताया गया है।

भवन के वास्तुविद संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इसे प्राकृतिक रोशनी और वायु संचार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि बिजली बंद होने की स्थिति में भी अंदर प्रकाश बना रहे। भविष्य में विधानसभा का विस्तार भी बिना तोड़फोड़ के किया जा सकेगा।

भवन की छत पर “धान का कटोरा” कहे जाने वाले राज्य की पहचान, धान की बालियों और पत्तियों की नक्काशी, उकेरी गई है। अधिकांश फर्नीचर और दरवाजे बस्तर के काष्ठ शिल्पियों द्वारा तैयार किए गए हैं।

नए सदन में 500 दर्शकों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, 100 सीटों वाला सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष और मंत्रियों के लिए अलग-अलग विंग, तथा पेपरलेस कार्य प्रणाली के लिए डिजिटल व्यवस्था की गई है।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह भवन “विंग-ए” (सचिवालय), “विंग-बी” (सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और अध्यक्ष कार्यालय), और “विंग-सी” (मंत्रालयीन कार्यालय) में विभाजित है। परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र और वर्षा जल संचयन के लिए दो कृत्रिम सरोवर भी बनाए जा रहे हैं।

यह भवन न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, कला और नवाचार का भी सशक्त प्रदर्शन है, एक ऐसा सदन जहाँ राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की आकांक्षाएँ आकार लेंगी।

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