देशव्यापी ‘SIR’ की तारीखें होंगी घोषित: मतदाता सूची में बड़ा बदलाव

चुनाव आयोग 27 अक्टूबर को करेगा पैन इंडिया एसआईआर की घोषणा; पश्चिम बंगाल समेत 10-15 राज्यों में पहले चरण में होगा पुनरीक्षण।

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  • बड़ी घोषणा: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 27 अक्टूबर, 2025 को देशव्यापी मतदाता सूची ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
  • दो चरणों में SIR: यह महत्वपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरे देश में एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में शुरू की जाएगी, जिसमें पहले चरण में 10 से 15 राज्य शामिल होंगे।
  • चुनाव वाले राज्य फोकस में: पहले चरण में उन राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहाँ 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: देश में मतदाता सूची की सटीकता और शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। आयोग 27 अक्टूबर, 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ‘पैन इंडिया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की विस्तृत तारीखों की घोषणा कर सकता है। यह SIR एक विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र नामों को हटाना है, साथ ही उन पात्र नागरिकों को जोड़ना है जो छूट गए हैं।

क्या है ‘पैन इंडिया एसआईआर’?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक व्यापक अभ्यास है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करते हैं। सूत्रों के अनुसार, देश के अधिकांश राज्यों में 2002 या 2004 के बाद से इस पैमाने पर सघन पुनरीक्षण नहीं हुआ है। शहरीकरण, बड़े पैमाने पर पलायन और अपात्र मतदाताओं के नामों के कारण मतदाता सूची की शुद्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। पैन इंडिया SIR का लक्ष्य इस समस्या को दूर करते हुए एक त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है।

दो चरणों में लागू होगी प्रक्रिया

ईसीआई ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के साथ दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें SIR की तैयारियों का जायजा लिया गया। इस बैठक के बाद यह तय हुआ है कि देशव्यापी SIR को दो चरणों में पूरा किया जाएगा:

पहला चरण: इसकी शुरुआत जल्द ही होने की संभावना है, जिसमें 2026 में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी सहित 10 से 15 अन्य राज्य शामिल होंगे।

दूसरा चरण: इसमें बाकी बचे हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा।

आयोग का लक्ष्य है कि पहले चरण का कार्य मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाए, ताकि इन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को एक नई और शुद्ध मतदाता सूची के आधार पर कराया जा सके।

बिहार का अनुभव और बंगाल में तैयारी

SIR की इस पहल के लिए बिहार में हुए हालिया एसआईआर अभ्यास को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बिहार में यह प्रक्रिया लगभग चार महीने (24 जून से 30 सितंबर तक) चली थी। ईसीआई अब इस समय-सीमा को कम करने की योजना बना रहा है।

पश्चिम बंगाल में इस अभ्यास के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। खबर है कि बंगाल में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की सहायता के लिए सरकारी कर्मचारियों में से स्वयंसेवकों (Volunteers) को भी नियुक्त किया जा सकता है। यह कदम पुनरीक्षण के कार्य को तेज और प्रभावी बनाने के लिए उठाया जा रहा है। इस पूरी कवायद से राज्यों में नए मतदान केंद्रों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।

यह राष्ट्रीय स्तर का अभ्यास भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला, यानी मतदाता सूची की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा, जिससे आगामी चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकेगी।

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