भारतीय वायुसेना बनी तीसरी सबसे शक्तिशाली: चीन तिलमिलाया, कहा- काबिलियत ज़मीन पर तय होती है!

WDMMA रैंकिंग में भारत से पिछड़ने पर बौखलाया ड्रैगन; चीनी विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति

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  • IAF की नई रैंकिंग: WDMMA की 2025 रैंकिंग में भारतीय वायुसेना (IAF) 69.4 के TruVal Rating (TVR) के साथ दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली एयरफोर्स बनी, जबकि चीन 63.8 TVR के साथ चौथे स्थान पर खिसक गया।
  • चीन की प्रतिक्रिया: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस रैंकिंग को ‘अर्थहीन’ बताया और कहा कि सेनाओं को कागज़ों पर नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध क्षमताओं के आधार पर आँका जाना चाहिए।
  • भारत की ताकत का कारण: रैंकिंग में भारत को बेहतर स्थान मिलने की वजह उसकी विमानों की संतुलित संख्या (फाइटर, हेलीकॉप्टर, ट्रेनर का मिश्रण), तेज प्रतिक्रिया क्षमता, बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट और पायलटों का उच्च प्रशिक्षण बताया गया है।

समग्र समाचार सेवा
बीजिंग/नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) द्वारा जारी दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायुसेनाओं की नवीनतम वैश्विक रैंकिंग ने एशिया के सामरिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस रैंकिंग में भारतीय वायुसेना (IAF) को अमेरिका और रूस के बाद तीसरा सबसे शक्तिशाली बल बताया गया है, जिसने पिछली रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रहे चीन को पछाड़कर चौथे पायदान पर धकेल दिया है। भारत के इस शानदार प्रदर्शन पर चीन की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है, जो उसकी ‘तिलमिलाहट’ को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

चीनी मुखपत्र का तीखा लेख: ‘कागज़ों की नहीं, ज़मीन की क्षमता देखो’

भारतीय वायुसेना के चीन को पछाड़कर तीसरे स्थान पर आने के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस रैंकिंग पर कड़ा विरोध जताते हुए एक लंबा लेख प्रकाशित किया। इस लेख का शीर्षक था: “सेनाओं की रैंकिंग कागज़ों पर नहीं बल्कि वास्तविक क्षमताओं के आधार पर होनी चाहिए- भारत की ‘दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली वायु सेना’ रैंकिंग पर चीनी विशेषज्ञ।”

चीनी विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट को पश्चिमी और भारतीय मीडिया द्वारा ‘प्रतिद्वंद्विता भड़काने’ की कोशिश बताया। उन्होंने तर्क दिया कि सैन्य बलों का आकलन असली युद्ध के मैदान पर उनके प्रदर्शन और लड़ाकू अनुभवों के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी ‘पेपर रैंकिंग’ के आधार पर। उनका यह भी कहना था कि भारत की वायुसेना रूस, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के विमानों का ‘कॉकटेल’ है, जबकि चीन अपने विमानों का स्वदेशी निर्माण कर रहा है।

WDMMA की रैंकिंग का आधार क्या है?

WDMMA की रैंकिंग केवल विमानों की संख्या पर आधारित नहीं होती है, जैसा कि चीन संकेत दे रहा है। यह रैंकिंग TruVal Rating (TVR) नामक एक विशेष पैमाने का उपयोग करती है, जो कुल लड़ाकू शक्ति, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट, हमला और रक्षा क्षमता, तकनीकी आधुनिकता और प्रशिक्षण जैसे 50 से अधिक कारकों को ध्यान में रखता है।

अमेरिका 242.9 TVR के साथ पहले स्थान पर है।

रूस 114.2 TVR के साथ दूसरे स्थान पर है।

भारत 69.4 TVR के साथ तीसरे स्थान पर है।

चीन 63.8 TVR के साथ चौथे स्थान पर है।

भले ही चीन के पास भारत से अधिक संख्या में कुल सैन्य विमान हों (चीन- 3,309, भारत- 1,716), लेकिन WDMMA ने भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट (31.6%), हेलीकॉप्टर (29%) और ट्रेनर एयरक्राफ्ट (21.8%) के संतुलित बेड़े को उसकी बेहतर परिचालन तैयारी (Operational Readiness) और बहु-डोमेन प्रतिक्रिया क्षमता का संकेत माना है।

एशिया के सामरिक संतुलन में बदलाव

भारत का यह उत्थान एशिया के सामरिक संतुलन में एक नाटकीय बदलाव का संकेत है। जहां चीन ने हमेशा खुद को एशिया की प्रमुख वायु शक्ति के रूप में प्रोजेक्ट किया है, वहीं इस रैंकिंग ने उसकी इस छवि को चुनौती दी है।

चीन की प्रतिक्रिया, जिसमें अस्वीकृति और बेचैनी का मिश्रण है, बताती है कि वह भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जाने से नाखुश है। भारत अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण और राफेल, सुखोई Su-30 MKI जैसे अत्याधुनिक विमानों के साथ-साथ स्वदेशी तेजस पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह रैंकिंग, भारतीय वायुसेना के पायलटों के बेहतर प्रशिक्षण और मिशन को अंजाम देने की तैयारी को दर्शाती है, जो कि किसी भी वास्तविक संघर्ष में निर्णायक साबित होती है।

 

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