नीतीश कुमार ही NDA के ‘सर्वसम्मत नेता’: CM चेहरे पर सस्पेंस के बीच JDU का स्पष्टीकरण

अमित शाह के बयान पर बिहार में सियासी बवाल, विपक्ष हमलावर

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  • शाह का बयान: अमित शाह ने कहा कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के बाद विधायक दल करेगा।
  • जेडीयू का रुख: जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीतीश कुमार को एनडीए का सबसे मजबूत और सर्वसम्मत नेता बताते हुए कहा कि सीएम बनने को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है।
  • विपक्षी हमला: विपक्ष ने इसे नीतीश कुमार को ‘शिंदे’ बनाने की बीजेपी की प्लानिंग बताया, जिससे बिहार की राजनीति में सीएम चेहरे को लेकर सस्पेंस गहरा गया है।

समग्र समाचार सेवा
पटना/नई दिल्ली, 20 अक्टूबर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक हालिया टिप्पणी ने बिहार के चुनावी माहौल में राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। अमित शाह ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि बिहार में एनडीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला गठबंधन के विधायक दल द्वारा किया जाएगा। इस बयान को लेकर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने जेडीयू और नीतीश कुमार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। इसी सियासी बवाल के बीच, जेडीयू ने नीतीश कुमार को एनडीए का सर्वसम्मत और निर्विवाद नेता बताते हुए स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

बीजेपी नेता के बयान से बढ़ा सियासी सस्पेंस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने बयान में कहा था कि वह मुख्यमंत्री बनाने वाले “कौन होते हैं”, यह फैसला तो चुनाव के बाद विधायक दल की बैठक में होगा। शाह ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रहा है और उन पर न सिर्फ बीजेपी बल्कि बिहार की जनता को भी पूरा भरोसा है।

लेकिन, शाह के इस ‘प्रक्रियात्मक’ बयान ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया। विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि क्या बीजेपी 2020 की तरह इस बार भी सबसे बड़ा दल बनने पर नीतीश कुमार को दरकिनार करने की योजना बना रही है? गौरतलब है कि 2020 के चुनाव में बीजेपी (74) ने जेडीयू (43) से अधिक सीटें जीतने के बावजूद गठबंधन धर्म निभाते हुए नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया था।

जेडीयू ने ‘सर्वसम्मत नेतृत्व’ पर ज़ोर दिया

अमित शाह की टिप्पणी के तुरंत बाद, जेडीयू ने गठबंधन के भीतर किसी भी विवाद या अस्पष्टता को खारिज करने के लिए कदम उठाए। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, “नीतीश कुमार अभी भी बिहार में एनडीए का सबसे मजबूत और सर्वसम्मत चेहरा हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि जब चुनाव ही नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है, तो मुख्यमंत्री कोई और कैसे बन सकता है?

जेडीयू ने यह भी याद दिलाया कि नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के एक प्रमुख नेता हैं, जिन्होंने हमेशा कांग्रेस का विरोध किया है और जेपी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जेडीयू के नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई भ्रम नहीं है और गठबंधन पूरी मजबूती के साथ नीतीश कुमार के चेहरे को आगे रखकर मैदान में है।

गठबंधन धर्म बनाम संख्या बल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जो 2020 के सीट बंटवारे (बीजेपी-110, जेडीयू-115) से अलग है। यह समान सीट बंटवारा दोनों दलों के बीच शक्ति संतुलन को दर्शाता है।

2020 का उदाहरण: अमित शाह ने स्वयं याद दिलाया कि 2020 में ज्यादा सीटें होने के बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार को सीएम बनाया, जो गठबंधन धर्म के प्रति बीजेपी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भविष्य की अनिश्चितता: हालांकि, शाह का ताजा बयान, जिसमें विधायक दल की बैठक में सीएम चुने जाने की बात कही गई है, चुनाव परिणाम के बाद की अनिश्चितता को रेखांकित करता है। यह स्पष्ट संकेत है कि सीटों की संख्या बल इस बार भी मुख्यमंत्री की कुर्सी का निर्णायक कारक हो सकता है।

फिलहाल, इस चुनावी मौसम में नीतीश कुमार का नेतृत्व एनडीए के लिए केंद्रीय धुरी बना हुआ है, लेकिन अमित शाह के बयान ने विपक्ष को बड़ा हथियार दे दिया है और जेडीयू की आंतरिक चिंताएं बढ़ गई हैं। इस पर पूर्ण विराम तभी लग पाएगा जब चुनाव के नतीजे सामने आएंगे और गठबंधन के नेता अपना अंतिम निर्णय लेंगे।

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