सुधा मूर्ति ने कर्नाटक जाति सर्वे में शामिल होने से किया इनकार
इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति ने बताया- 'हम पिछड़ा वर्ग से नहीं आते'
- राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति और उनके पति नारायण मूर्ति ने कर्नाटक में जारी जातिगत सर्वेक्षण में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
- मूर्ति दंपति ने अधिकारियों को दिए घोषणापत्र में कहा कि वे पिछड़ा वर्ग से नहीं आते हैं, इसलिए उनका सर्वे में शामिल होना सरकार के काम का नहीं होगा।
- कांग्रेस शासित कर्नाटक में यह सर्वेक्षण 22 सितंबर को शुरू हुआ था और धीमी प्रगति के चलते इसकी अवधि को 10 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है।
समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु, 16 अक्टूबर: प्रसिद्ध लेखिका और समाजसेवी सुधा मूर्ति और उनके पति, इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति, ने कर्नाटक में चल रहे सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण (जिसे आमतौर पर जातिगत जनगणना कहा जाता है) में भाग लेने से इनकार कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते हफ्ते जब सर्वे से जुड़े अधिकारी मूर्ति दंपति के जयनगर स्थित आवास पर पहुँचे, तो उन्होंने सर्वेक्षण में शामिल न होने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को एक घोषणापत्र भी सौंपा है। इस घोषणापत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है, “हम किसी पिछड़ा वर्ग से नहीं आते हैं। ऐसे में इस सर्वे में हमारा शामिल होना सरकार के लिए किसी भी काम का नहीं होगा। ऐसे में हम प्रतिभागित करने से इनकार करते हैं।” हालांकि, इस घोषणापत्र को लेकर मूर्ति दंपति ने आधिकारिक तौर पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
सर्वेक्षण में धीमी प्रगति और अवधि का बढ़ना
कांग्रेस शासित कर्नाटक में इस जाति जनगणना की शुरुआत 22 सितंबर को हुई थी और इसे 7 अक्टूबर तक पूरा होना था। हालांकि, सर्वेक्षण के काम में अत्यधिक देरी होने के कारण, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक के बाद इसकी अवधि को 10 दिनों के लिए और बढ़ाने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने जानकारी दी कि पूरे राज्य में सर्वेक्षण उनकी अपेक्षा के अनुरूप पूरा नहीं हो सका है। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में अब तक केवल 34 प्रतिशत सर्वेक्षण ही पूरा हुआ है। इसके अलावा, उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जैसे जिलों में भी क्रमशः 63 और 60 प्रतिशत ही काम हो पाया है।
सर्वे में पूछे जा रहे 80 सवाल
जाति सर्वेक्षण के तहत, अधिकारी राज्य के घरों से जानकारी जुटा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल होने वाले लोगों ने कुल सवालों में से महज 25 प्रतिशत के ही जवाब दिए हैं। इस सर्वे में 60 मुख्य प्रश्न और 20 उप प्रश्न सहित कुल 80 सवाल शामिल हैं, जो लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति से संबंधित हैं।
इस सर्वेक्षण का उद्देश्य राज्य में पिछड़ा वर्ग की सही स्थिति का आकलन करना है, ताकि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ लक्षित समूहों तक पहुँचाया जा सके। हालांकि, सुधा मूर्ति जैसे प्रमुख व्यक्ति का इस आधार पर इनकार करना कि वे पिछड़े वर्ग से नहीं हैं, सर्वे की प्रकृति और उद्देश्य को लेकर एक नई बहस छेड़ सकता है।