छिंदवाड़ा मामला: कफ सिरप के नुस्खे में कमीशन, बच्चों की मौत के आरोप में डॉक्टर गिरफ्तार
डॉक्टर पर आरोप, तमिलनाडु की फार्मा कंपनी से 10% कमीशन लेकर बच्चों को दी गई जहरीली दवा
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डॉक्टर प्रवीण सोनी पर 10% कमीशन लेकर मिलावटी कोल्ड्रिफ सिरप लिखने का आरोप।
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तमिलनाडु सरकार ने कंपनी का लाइसेंस रद्द कर, उसे बंद करने का आदेश दिया।
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पुलिस रिपोर्ट में बताया गया कि अब तक 15 बच्चों की मौत सिरप के सेवन से हुई।
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अदालत ने डॉक्टर की जमानत याचिका 8 अक्टूबर को खारिज कर दी।
समग्र समाचार सेवा
छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश | 14 अक्टूबर: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सामने आए बच्चों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण सोनी ने एक कफ सिरप कंपनी से 10% कमीशन लेकर जहरीली दवा लिखी, जिससे 15 बच्चों की मौत हो गई।
राज्य पुलिस ने सत्र अदालत को बताया कि डॉक्टर सोनी ने तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर से यह कमीशन लिया था। यही कंपनी मिलावटी कोल्ड्रिफ सिरप बना रही थी, जिसे बच्चों की मौत से जोड़ा गया है।
कंपनी बंद करने का आदेश जारी
तमिलनाडु सरकार ने इस घटना के बाद कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया और उसे बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने श्रीसन कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की है।
अदालत ने जमानत याचिका ठुकराई
डॉक्टर सोनी ने अदालत से जमानत मांगी थी, लेकिन 8 अक्टूबर को अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौतम कुमार गुर्जर ने कहा कि डॉक्टर ने “जानबूझकर एक खतरनाक और मिलावटी दवा का नुस्खा लिखा और उसके उपयोग की अनुमति दी”, जबकि दिसंबर 2023 में सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसी दवाएं देने पर रोक लगा दी थी।
सरकार के निर्देशों की अनदेखी
पुलिस की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि 18 दिसंबर 2023 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें स्पष्ट लिखा था कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाएं नहीं दी जाएं।
इसके बावजूद डॉक्टर सोनी ने कोल्ड्रिफ सिरप जैसी दवाएं लिखीं, जो बच्चों में मूत्र रुकावट, गुर्दे की विफलता और लिवर फेल का कारण बन रही थीं।
15 बच्चों की जान गई, रिश्वत का खुलासा
रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके इलाज के दौरान अब तक 15 बच्चों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने जांच में पाया कि कंपनी डॉक्टर को 10% कमीशन दे रही थी ताकि वह अपनी प्रिस्क्रिप्शन में उनकी दवा लिखे।
डॉक्टर का बचाव
डॉक्टर सोनी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनके वकील पवन कुमार शुक्ला ने अदालत में कहा कि डॉक्टर सरकारी चिकित्सक हैं और “वे केवल इलाज के दौरान उपलब्ध दवाएं लिखते थे।”
वकील ने कहा कि “यह दवा का दूषित बैच कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था, जिसके बारे में डॉक्टर को कोई जानकारी नहीं थी। दवा की गुणवत्ता जांचना ड्रग कंट्रोलर विभाग की जिम्मेदारी है।”
परिवार पर भी जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस ने बताया कि जांच डॉक्टर के परिवार के सदस्यों तक भी पहुंच गई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि उनके निजी क्लिनिक के बगल में एक मेडिकल स्टोर है, जो उनके रिश्तेदारों के स्वामित्व में है।
साथ ही छिंदवाड़ा में खतरनाक सिरप का स्टॉक रखने वाले व्यक्ति का संबंध भी उनके परिवार से है।
एफआईआर दर्ज और आगे की कार्रवाई
इस मामले में 4 अक्टूबर को पहली बार एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें डॉक्टर प्रवीण सोनी, श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर के निदेशक और जबलपुर स्थित एक थोक विक्रेता को आरोपी बनाया गया है।
एफआईआर में कहा गया है कि कई बच्चों की मौत उस कोल्ड्रिफ सिरप से हुई जिसमें जहरीला रसायन डायथिली पाया गया।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब दवा के सैंपल और सप्लाई चैन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने कंपनी के खिलाफ फौजदारी मामला दर्ज करने का निर्णय लिया है।