आप सिर्फ भाजपा के नहीं, भारत के पीएम हैं: ममता बनर्जी का मोदी पर पलटवार
बाढ़ संकट के बीच बंगाल हिंसा पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद; PM मोदी को संवैधानिक मर्यादा की याद दिलाई
- राजनीतिकरण का आरोप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बंगाल के बाढ़ संकट को ‘राजनीतिक रंग’ देने का गंभीर आरोप लगाया।
- संवैधानिक मर्यादा: ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री को ‘सिर्फ भाजपा का नहीं, बल्कि भारत का प्रधानमंत्री’ बनकर व्यवहार करना चाहिए।
- घटना का कारण: यह विवाद उत्तरी बंगाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भाजपा नेताओं पर हुए हमले पर पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ।
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 7 अक्टूबर 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच राजनीतिक तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तरी बंगाल के बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्र में भाजपा के एक सांसद (खगेन मुर्मू) और विधायक (शंकर घोष) पर हुए हमले पर टिप्पणी की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर इस घटना को “बेहद भयावह” बताया और कहा कि यह हमला तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की “असंवेदनशीलता” और राज्य की “पूरी तरह दयनीय कानून-व्यवस्था” को दर्शाता है।
पीएम मोदी की इस टिप्पणी पर तुरंत पलटवार करते हुए ममता बनर्जी ने उसी प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद चिंताजनक है कि भारत के प्रधानमंत्री ने उचित जांच का इंतजार किए बिना एक प्राकृतिक आपदा का राजनीतिकरण करने का फैसला किया है, खासकर जब उत्तरी बंगाल के लोग विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद की स्थिति से जूझ रहे हैं।”
“आप संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन कर रहे हैं”
ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री मोदी को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी की याद दिलाई। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करती हूँ: केवल अपनी पार्टी के सहयोगियों की नहीं, बल्कि चुनी हुई राज्य सरकार की बात भी सुनें। आप सिर्फ भाजपा के नहीं, भारत के प्रधानमंत्री हैं। आपकी जिम्मेदारी राष्ट्र निर्माण में है, न कि राजनीतिक नैरेटिव बनाने में।”
मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी पर “बिना किसी सत्यापित सबूत, कानूनी जांच या प्रशासनिक रिपोर्ट” के सीधे टीएमसी और राज्य सरकार पर आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे “संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन” बताया, जिसकी शपथ प्रधानमंत्री ने ली है।
राहत कार्य में बाधा डालने का आरोप
ममता बनर्जी ने दावा किया कि जब प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से राहत और बचाव कार्यों में लगे हुए थे, तब भाजपा नेताओं ने “स्थानीय पुलिस और प्रशासन को बिना किसी सूचना के” केंद्रीय बलों की सुरक्षा में और बड़ी संख्या में कारों के काफिले के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जाने का फैसला किया।
टीएमसी प्रमुख ने कहा कि हमले की घटना एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में हुई है, जहाँ की जनता ने स्वयं भाजपा विधायक को चुना है, लेकिन प्रधानमंत्री इसे टीएमसी की “तथाकथित दबंगई” के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस तरह के “आधारहीन सामान्यीकरण” को “अपरिपक्व” और देश के सर्वोच्च पद के लिए “अशोभनीय” बताया।
बनर्जी ने भाजपा पर चुनाव से पहले उत्तरी बंगाल बनाम दक्षिणी बंगाल की राजनीति कर लोगों को बाँटने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “बंगाल भावनात्मक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से एक है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि राहत और पुनर्वास है। उन्होंने प्रधानमंत्री से “इस नाजुक समय में विभाजन को गहरा न करने” और पार्टी लाइनों से ऊपर उठकर लोगों की सेवा करने का आग्रह किया।