जुबीन गर्ग मौत की गुत्थी: क्या ये महज हादसा था या साजिश?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सवाल, स्कूबा डाइविंग थ्योरी पर संदेह
-
19 सितंबर को हुई थी जुबीन गर्ग की संदिग्ध मौत।
-
फेस्टिवल से एक दिन पहले मौत ने उठाए कई सवाल।
-
चार गिरफ्तारियां, हत्या की धारा भी जोड़ी गई।
-
60 से ज्यादा शिकायतें और पूरे असम में गुस्से का माहौल।
समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 3 अक्टूबर: असम के प्रख्यात गायक और रॉकस्टार ऑफ द ईस्ट माने जाने वाले जुबीन गर्ग की मौत अब रहस्य और साजिश के घेरे में घिरती दिख रही है। 19 सितंबर को सिंगापुर में उनके अचानक निधन की खबर पहले एक दुर्घटना की तरह आई थी, लेकिन अब यह केस हत्या की ओर इशारा कर रहा है।
शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि स्कूबा डाइविंग करते समय उनकी सांस टूटने से मौत हो गई। लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो यह वजह संदिग्ध लगने लगी। रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण स्पष्ट रूप से “डूबना” बताया गया। सवाल यही उठा कि एक अनुभवी और फिट आर्टिस्ट, जो नियमित रूप से ट्रेंनिंग लेते थे, बिना किसी गड़बड़ी के इस तरह अचानक कैसे डूब सकते हैं?
अब चर्चाएं तेज हैं कि क्या यह महज हादसा नहीं, बल्कि एक साजिश थी। इस शक को और गहराई तब मिली जब उनकी पत्नी सैकिया गर्ग ने सीधे उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा था कि जुबीन पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव में थे और मैनेजर के व्यवहार से परेशान थे।
इसी आधार पर असम पुलिस और सीआईडी ने जांच को हत्या की दिशा में मोड़ दिया। पहले गैर-इरादतन हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के मामले दर्ज हुए, लेकिन बाद में सीआईडी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 जोड़कर हत्या का केस पक्का कर दिया। इसके साथ ही आयोजक श्यामकानु महंता को भी गिरफ्तार किया गया। अब तक चार लोग गिरफ्त में हैं और कई अन्य संदेह के घेरे में हैं।
सीआईडी सूत्रों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां आर्थिक विवाद, शो के कॉन्ट्रैक्ट और निजी मतभेदों से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले सब कुछ महज अटकल माना जा रहा है।
जांच टीम के प्रमुख एमपी गुप्ता ने खुलासा किया कि भारत से एक विशेष टीम अब सिंगापुर जाएगी। वहां की पुलिस के साथ मिलकर टीम जुबीन की मौत की परिस्थितियों का बारीकी से विश्लेषण करेगी। औपचारिक अनुमतियां पूरी हो चुकी हैं।
इस बीच असम में लोगों का गुस्सा लगातार भड़क रहा है। राज्यभर में स्टार गायक की मौत के बाद 60 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हुईं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, आंदोलन जारी रहेगा।
जुबीन गर्ग केवल एक गायक नहीं, बल्कि असमिया संस्कृति और पहचान के प्रतीक थे। उनकी आवाज़ ने एक पूरे क्षेत्र को देश-विदेश में सम्मान दिलाया। उनकी संदिग्ध मौत ने इस इलाके के संगीत, संस्कृति और राजनीति पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब निगाहें सिर्फ और सिर्फ जांच एजेंसियों पर हैं। क्या यह सचमुच एक हादसा था या फिर किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा—यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।