सोनम वांगचुक NSA के तहत गिरफ्तार भेजे गए जोधपुर जेल

लद्दाख में तीसरे दिन भी कर्फ्यू, वांगचुक पर हिंसा भड़काने और शांति भंग करने का आरोप

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • प्रसिद्ध शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेह पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
  • गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें लेह से राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।

समग्र समाचार सेवा
लेह/जोधपुर, 27 सितंबर: लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद से तनाव का माहौल बना हुआ है। लेह शहर में लगातार तीसरे दिन भी कर्फ्यू जारी है और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया है और साथ ही मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया है। यह फैसला किसी भी तरह की अफवाह को फैलने से रोकने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए लिया गया है। प्रशासन की ओर से लोगों के इकट्ठा होने पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है।

NSA के तहत गिरफ्तारी और जोधपुर शिफ्टिंग

लद्दाख प्रशासन के अधिकारियों ने शुक्रवार को सोनम वांगचुक को उनके गांव उल्याकटोपो से हिरासत में लिया। वांगचुक पर लेह में हुई हिंसा के लिए भीड़ को भड़काऊ भाषणों से उकसाने का आरोप है। प्रशासन का आरोप है कि उनकी गतिविधियों से राज्य की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ और सार्वजनिक शांति भंग हुई।

गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद, वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) 1980 के तहत हिरासत में लिया गया। यह अधिनियम सरकार को किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकतम 12 महीने तक बिना मुकदमे के हिरासत में रखने की अनुमति देता है। सुरक्षा कारणों और लद्दाख में संभावित अशांति को रोकने के उद्देश्य से, उन्हें विशेष विमान से लेह से लगभग 1,000 किलोमीटर दूर राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया। जोधपुर जेल को देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है, जहाँ उन्हें हाई-सिक्योरिटी वार्ड में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा गया है।

हिंसा के पीछे क्या था कारण?

सोनम वांगचुक ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (LAB) के बैनर तले लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। छठी अनुसूची आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्त शक्तियां प्रदान करती है। वांगचुक ने हिंसा से पहले 15 दिन की भूख हड़ताल भी की थी, जिसे उन्होंने हिंसा भड़कने के बाद वापस ले लिया था।

प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ने अपने भाषणों में नेपाल के आंदोलन और अरब स्प्रिंग जैसे हिंसक विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया, जिससे भीड़ हिंसक हो उठी। इस हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय बीजेपी कार्यालय और कुछ सरकारी वाहनों को आग लगा दी थी, जिसके बाद पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। प्रशासन ने उनकी संस्था ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (SECMOL) का विदेशी चंदा (FCRA) लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।

वहीं, वांगचुक और LAB के नेताओं ने हिंसा में अपनी भूमिका से इनकार किया है और आरोपों को “बलि का बकरा बनाने” जैसा बताया है। उनका कहना है कि विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ युवाओं का गुस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया था।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.