समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 4 सितंबर -भारत सरकार ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की दरों में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इस नए सुधार का सीधा असर आम आदमी की जेब पर दिखेगा। जहां रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों के दाम घटेंगे, वहीं लग्ज़री और सेहत को नुकसान पहुँचाने वाले उत्पादों की कीमतों में इज़ाफ़ा होगा।
कौन-कौन से उत्पाद होंगे सस्ते?
1. खाद्य सामग्री पर राहत
सबसे बड़ी राहत खाने-पीने की वस्तुओं पर दी गई है। ब्रेड, चीज़ और दूध जैसे उत्पादों पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा। यही नहीं, नूडल्स, चनाचूर, निमकी और भुजिया जैसे लोकप्रिय स्नैक्स की कीमतें भी कम हो जाएँगी। इसका असर सीधे तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा, जो हर महीने का बड़ा हिस्सा खाद्य सामग्री पर खर्च करते हैं।
2. रसोई और बाथरूम की ज़रूरी चीज़ें
तेल, साबुन, शैम्पू, टूथब्रश, शेविंग क्रीम जैसी रोज़ाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं पर जीएसटी की दर घटा दी गई है। पहले इन पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे 5 प्रतिशत की श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी रसोई और बाथरूम का बजट हल्का होगा।
3. बच्चों के उपयोग की चीज़ें
डायपर और नैपकिन की कीमतें भी अब कम होंगी। यह राहत उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है, जिनके छोटे बच्चे हैं और जिन्हें हर महीने इस पर अच्छा-खासा खर्च करना पड़ता है।
4. पढ़ाई-लिखाई का सामान
बही-खाता, पेन, पेंसिल, रबर जैसी स्टेशनरी वस्तुएँ अब सस्ती हो जाएँगी। इसका सीधा लाभ छात्रों, अभिभावकों और छोटे व्यवसायियों को मिलेगा।
5. कपड़े और जूते
कपड़े और जूतों की कीमतों में कमी आएगी। यह कदम त्योहारों के मौसम में खास राहत देने वाला साबित होगा, क्योंकि इस समय बाज़ार में कपड़े और फुटवियर की खपत बढ़ जाती है।
6. खेती-किसानी के उत्पाद
विभिन्न कृषि उत्पादों और कीटनाशकों की कीमतें घटेंगी। इसका असर किसानों पर पड़ेगा और अप्रत्यक्ष रूप से सब्ज़ियों और अन्य कृषि उत्पादों के दाम भी कम हो सकते हैं।
7. दवाइयाँ
जीवन रक्षक दवाइयों की कीमतों में कटौती का एलान सबसे अहम है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो गंभीर बीमारियों के इलाज में भारी खर्च का सामना करते हैं।
8. वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स
स्कूटर, बाइक और कार पर जीएसटी की दर घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। इसके चलते वाहन सस्ते होंगे और आम आदमी को सफ़र आसान पड़ेगा।
टीवी, एसी, वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें भी कम होंगी। यानी मध्यम वर्ग अब घर के उपकरण आसानी से खरीद सकेगा।
किन उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी?
सरकार ने सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ों को ही सस्ता नहीं किया है, बल्कि उन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाया है जो सेहत के लिए नुकसानदायक या अत्यधिक विलासिता से जुड़ी हैं।
कोल्ड ड्रिंक और गुटखा पर टैक्स बढ़ेगा।
सिगरेट की कीमतों में भी भारी इज़ाफ़ा होगा।
लग्ज़री कारें और 350 सीसी से ऊपर की बाइक महँगी होंगी।
इस बढ़ोतरी का मक़सद एक ओर सरकार के राजस्व को सुरक्षित करना है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य और सामाजिक हितों की रक्षा करना भी है।
नई टैक्स व्यवस्था: तीन स्लैब
अब जीएसटी के केवल तीन स्लैब रहेंगे — 5%, 18% और 40%।
5% श्रेणी में रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें और खाद्य सामग्री आएँगी।
18% श्रेणी में वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सामान्य उपभोक्ता वस्तुएँ शामिल होंगी।
40% की ऊँची दर केवल विलासिता और सेहत को नुकसान पहुँचाने वाले उत्पादों पर लागू होगी, जैसे सिगरेट, गुटखा और लग्ज़री कारें। इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा लाभ मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा। उनके लिए खाने-पीने, शिक्षा, कपड़े, जूते, वाहन और घरेलू उपकरणों जैसी ज़रूरी चीज़ें अब पहले से सस्ती होंगी। वहीं सरकार ने महँगी और सेहत बिगाड़ने वाली वस्तुओं को महँगा करके एक तरह से संतुलन बनाने की कोशिश की है।
निष्कर्ष
जीएसटी सुधार के इस नए दौर से जहाँ आम जनता को राहत मिलेगी, वहीं सरकार को भी उम्मीद है कि टैक्स ढाँचे के सरल होने से संग्रहण बढ़ेगा और पारदर्शिता आएगी। दैनिक ज़रूरतों की वस्तुएँ सस्ती होना न सिर्फ़ जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि लोगों की ख़रीद क्षमता भी बढ़ाएगा। दूसरी ओर, लग्ज़री और हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाना सरकार की स्वास्थ्य और आर्थिक नीति के अनुरूप है।
कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि यह सुधार आम आदमी के हित में है और आने वाले समय में बाज़ार पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।