- लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री चेहरे पर विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने ‘शादी’ और ‘सुहागरात’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
- उन्होंने कहा कि जब तक लोकसभा चुनाव खत्म नहीं हो जाते, तब तक सीएम फेस की बात करना बेमानी है, जिससे महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान उजागर हुई।
- रोहिणी के इस बयान ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर चल रहे मतभेदों को और गहरा कर दिया है।
समग्र समाचार सेवा
पटना, 31 अगस्त, 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है। पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। इसी बीच, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस बयान ने न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है, बल्कि महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान को भी उजागर किया है।
जब रोहिणी आचार्य से पत्रकारों ने सवाल किया कि बिहार में अब तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा क्यों नहीं घोषित किया गया है, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, “अभी वोटर अधिकार की बात चल रही है। अभी शादी की बात ही नहीं चल रही, यहां सुहागरात किसके साथ मनाई जाएगी, उसकी बात चल रही है क्या? जो ज्यादा जरूरी है वो बात होगी।”
रोहिणी के बयान के राजनीतिक मायने
रोहिणी आचार्य का यह बयान कई राजनीतिक मायने रखता है। सबसे पहले, यह ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर नेतृत्व और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान को दिखाता है। जहां एक तरफ लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव लगातार तेजस्वी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रोहिणी का यह बयान कहीं न कहीं इसी असमंजस को दर्शाता है।
इस बयान से यह भी साफ होता है कि महागठबंधन के सहयोगी दल अभी तक इस मुद्दे पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। जहां आरजेडी चाहती है कि तेजस्वी को जल्द से जल्द सीएम फेस घोषित किया जाए, वहीं कांग्रेस सहित अन्य दल इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी मतभेद हैं, और इसी वजह से सीएम चेहरे पर सहमति नहीं बन पा रही है।
एनडीए बनाम महागठबंधन: कांटे की टक्कर
बिहार में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होने की उम्मीद है। एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री चेहरा बनाए रखने की बात कही जा रही है। ऐसे में, महागठबंधन के लिए यह जरूरी है कि वह चुनाव से पहले अपने सीएम चेहरे का ऐलान कर दे ताकि जनता के बीच एक स्पष्ट संदेश जाए।
हालांकि, रोहिणी आचार्य जैसे नेताओं के इस तरह के विवादित बयान गठबंधन की एकजुटता को कमजोर कर सकते हैं। विपक्ष, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), इस बयान को मुद्दा बनाकर महागठबंधन पर हमलावर हो गई है। भाजपा नेताओं ने इस बयान को ‘अभद्र’ और ‘अशोभनीय’ बताते हुए कहा है कि यह आरजेडी की मानसिकता को दिखाता है।
कुल मिलाकर, रोहिणी आचार्य के इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या वे चुनाव से पहले सीएम चेहरे और सीट बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला ले पाते हैं।