पीएम मोदी और दरुमा गुड़िया: भारत-जापान के आध्यात्मिक रिश्ते का प्रतीक

सांस्कृतिक जुड़ाव: सिर्फ व्यापार नहीं, आध्यात्मिक संबंध भी

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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान में ‘दरुमा गुड़िया’ भेंट की गई, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाती है।
  • यह गुड़िया भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म से प्रेरित है, जिन्होंने जापान में ज़ेन बौद्ध धर्म की स्थापना की थी।
  • दरुमा गुड़िया धैर्य, दृढ़ संकल्प और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है, जो ‘सात बार गिरो, आठ बार उठो’ के जापानी मुहावरे का प्रतिनिधित्व करती है।

समग्र समाचार सेवा
टोक्यो, 30 अगस्त, 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा ने न केवल आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है, बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी एक बार फिर उजागर किया है। इस यात्रा के दौरान, जापान के एक प्रसिद्ध मंदिर, शोरिनज़ान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेवरेंड सेशी हिरोसे ने पीएम मोदी को एक पारंपरिक ‘दारुमा गुड़िया’ भेंट की। यह उपहार एक साधारण तोहफा नहीं है, बल्कि भारत और जापान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक शक्तिशाली प्रतीक है।

विदेश मंत्रालय ने भी इस विशेष भाव को भारत और जापान के बीच घनिष्ठ सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों की पुष्टि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “दारुमा को जापान में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है और इसका भारत से भी संबंध है। यह प्रसिद्ध भिक्षु बोधिधर्म से प्रभावित है।”

बोधिधर्म का जापान से संबंध

दरुमा गुड़िया की कहानी सीधे तौर पर भारत से जुड़ी है। माना जाता है कि यह गुड़िया पांचवीं शताब्दी के एक भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म से प्रेरित है, जो तमिलनाडु के कांचीपुरम से चीन और फिर जापान गए थे। उन्हें जापान में ‘दारुमा दाइशी’ के नाम से जाना जाता है और उन्हें ज़ेन बौद्ध धर्म का संस्थापक माना जाता है। किंवदंती के अनुसार, बोधिधर्म ने लगातार नौ वर्षों तक दीवार की ओर मुख करके ध्यान किया, जिसके कारण उनके हाथ-पैर सिकुड़ गए। इसी कारण, दरुमा गुड़िया का आकार गोल और बिना हाथ-पैर के होता है, जो अटूट ध्यान और अनुशासन का प्रतीक है।

यह गुड़िया जापान में दृढ़ संकल्प और सौभाग्य का प्रतीक है। इसे अक्सर बिना आंखों के बेचा जाता है। जब कोई व्यक्ति कोई लक्ष्य निर्धारित करता है, तो वह गुड़िया की एक आंख में रंग भरता है। जब लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो दूसरी आंख भी भर दी जाती है। इस परंपरा से एक जापानी कहावत भी जुड़ी है: “नानाकोरोबी याओकी” जिसका अर्थ है “सात बार गिरो, आठ बार उठो”। गुड़िया का गोल निचला भाग इसे पलटने पर भी वापस सीधा खड़ा कर देता है, जो हार न मानने के गुण को दर्शाता है।

कूटनीति में सांस्कृतिक प्रतीक का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी को यह गुड़िया भेंट किया जाना सिर्फ एक सांकेतिक कार्य नहीं है। यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच संबंध सिर्फ व्यापार या रक्षा सौदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका आधार साझा इतिहास, संस्कृति और दार्शनिक मूल्य भी हैं। यह जापान के लिए भी एक संदेश है कि भारत अपनी सभ्यतागत विरासत को महत्व देता है, और इस तरह के आदान-प्रदान से दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होते हैं।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में, भारत और जापान के बीच बढ़ती साझेदारी न केवल आर्थिक और सुरक्षा के लिए बल्कि एक संतुलित और शांतिपूर्ण भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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