कर्नाटक: सरकारी विद्यालय में कक्षा 9 की छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म

कर्नाटक : सरकारी आवासीय विद्यालय में कक्षा 9 की छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, गंभीर लापरवाही उजागर

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समग्र समाचार सेवा
यादगिर (कर्नाटक)29 अगस्त – यादगिर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के एक सरकारी आवासीय विद्यालय में कक्षा 9 की एक 17 वर्षीय छात्रा ने विद्यालय के शौचालय में ही एक शिशु को जन्म दिया। बुधवार (27 अगस्त 2025) दोपहर लगभग 2 बजे छात्रा प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी, तभी सहपाठियों ने उसे देखा और तुरंत विद्यालय प्रशासन को सूचना दी। छात्रा और नवजात को बाद में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ  दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

यौन शोषण का मामला दर्ज

एफआईआर के अनुसार छात्रा लगभग 9–10 महीने पहले अज्ञात व्यक्ति द्वारा यौन शोषण का शिकार हुई थी। पीड़िता अब तक यह बताने से इंकार कर रही है कि अपराधी कौन था और क्या विद्यालय या अन्य लोग इस घटना से पहले से अवगत थे। पीड़िता के भाई के अनुरोध पर विद्यालय प्रशासन ने तत्काल इस प्रसव की जानकारी बाहर नहीं दी, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।

चार कर्मचारी निलंबित

घटना की जानकारी मिलते ही यादगिर के उपायुक्त हर्षल भोयर, पुलिस अधीक्षक पृथ्वीक शंकर और जिला पंचायत के सीईओ लविश ओर्डिया अस्पताल पहुंचे। उपायुक्त ने इसे विद्यालय प्रशासन की गंभीर चूक बताया।
कर्नाटक रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन सोसाइटी (KREIS) ने प्रथम दृष्टया लापरवाही के आधार पर चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें विद्यालय की प्रधानाध्यापिका बसम्मा, वार्डन गीता, विज्ञान शिक्षक नरसिंहमूर्ति और शारीरिक शिक्षा शिक्षक श्रीधर शामिल हैं। इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

स्वास्थ्य निगरानी में भारी लापरवाही

निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया कि विद्यालय प्रशासन छात्रा की स्वास्थ्य जांच और उपस्थिति पर ध्यान नहीं दे रहा था। इस शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से छात्रा महीने में औसतन सिर्फ 10 दिन ही कक्षाओं में उपस्थित रहती थी। नर्स का कहना है कि छात्रा ने गर्भावस्था के कोई लक्षण पहले प्रदर्शित नहीं किए थे।

बाल अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) ने घटना की कड़ी निंदा की और स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने की घोषणा की। आयोग के सदस्य शशिधर कोसुंबे ने कहा कि विद्यालय प्रशासन पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है। इसके निर्देश पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी निर्मला हॉम्बन्ना ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कानूनी कार्रवाई शुरू

पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64, पोक्सो अधिनियम 2012 की धाराएँ  4, 6 और 19 तथा किशोर न्याय अधिनियम 2025 की धाराएं 33 और 34 के तहत दर्ज किया है। एफआईआर में अज्ञात अपराधी को आरोपी नंबर एक बनाया गया है। इसके अलावा विद्यालय की वार्डन गीता, नर्स कावेरीम्मा, प्रधानाध्यापिका बसम्मा और शरणबसवा नामक व्यक्ति को भी नामजद किया गया है।

सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता चन्नप्पा अनेगुंडी ने कहा कि विद्यालय में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी छात्राओं की स्वास्थ्य निगरानी क्यों नहीं कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की स्पष्ट गाइडलाइंस के बावजूद नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं हुई, जिससे यह घटना घटित हुई।

कर्नाटक में पिछले तीन वर्षों में 80 हजार से अधिक किशोर गर्भधारण के मामले सामने आए हैं, जो इस घटना को और भी चिंताजनक बनाता है। यह मामला न केवल विद्यालय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है बल्कि राज्य की किशोर सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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