डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का भारत पर क्या होगा असर? फिच रेटिंग्स ने जारी की रिपोर्ट

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • फिच रेटिंग्स के अनुसार, ट्रंप के 50% टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मामूली असर होगा।
  • एजेंसी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान लगाया है।
  • यह अनुमान भारत की मजबूत वृद्धि और ठोस विदेशी निवेश पर आधारित है, जो इसे अन्य देशों से अलग करता है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 अगस्त, 2025: अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चल रही चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत कम या न के बराबर असर पड़ेगा। यह आकलन इस तथ्य पर आधारित है कि अमेरिका को भारत का कुल निर्यात देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 2% है, जिससे बड़े आर्थिक झटके का खतरा नगण्य हो जाता है।

भारत की विकास दर रहेगी मजबूत: फिच का अनुमान

फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट भारत के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आई है। एजेंसी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान लगाया है। यह मजबूत अनुमान, भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक स्थिरता और बाहरी निवेश के प्रवाह को दर्शाता है। फिच ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत का आर्थिक परिदृश्य मजबूत बना हुआ है। इसका मुख्य कारण घरेलू मांग में वृद्धि, सरकार की नीतियों में स्थिरता और विदेशी निवेश का लगातार बढ़ना है। ये कारक मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाने में मदद कर रहे हैं।

जीएसटी सुधारों से उपभोग को मिलेगा बढ़ावा

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित जीएसटी सुधारों से उपभोग को बढ़ावा मिलेगा। ये सुधार न केवल आर्थिक विकास को गति देंगे, बल्कि विकास से जुड़े कुछ जोखिमों को भी कम करने में सहायक होंगे। जीएसटी के सरलीकरण और इसके दायरे को बढ़ाने से व्यापार करना आसान होगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों को विशेष लाभ होगा। यह बदले में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और घरेलू मांग को और मजबूत करेगा, जो भारत की विकास गाथा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

घरेलू मांग और निवेश: विकास के मुख्य इंजन

फिच की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का राज उसकी घरेलू मांग और निवेश में छिपा है। भारत एक विशाल घरेलू बाजार है, और जब वैश्विक व्यापार में बाधाएं आती हैं, तब भी यह आंतरिक मांग के सहारे अपनी गति बनाए रख सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशक भारत को एक स्थिर और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल और विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा देने की नीतियों ने इस विश्वास को और मजबूत किया है। इन सबका परिणाम यह है कि भारत का आर्थिक भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है, भले ही अमेरिका जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ कुछ चुनौतियां हों।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.