- 11 साल की उम्र में काजोल ने अपनी एक दोस्त के साथ पंचगनी के बोर्डिंग स्कूल से भागने की कोशिश की थी।
- उन्होंने यह कदम अपनी परदादी से मिलने के लिए उठाया था, जिनकी तबीयत खराब थी, लेकिन परिवार ने घर जाने की अनुमति नहीं दी थी।
- यह घटना उनकी बचपन की बेबाक और मनमौजी शख्सियत को दर्शाती है, जिसे उन्होंने बड़े होकर भी बनाए रखा।
समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 24 अगस्त, 2025: हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री काजोल अपनी बेबाक अदा और मनमौजी स्वभाव के लिए हमेशा से जानी जाती रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका यह व्यक्तित्व बचपन से ही उनके साथ था? हाल ही में, उनसे जुड़ा एक किस्सा सामने आया है, जो उनके बचपन के इसी विद्रोही स्वभाव की झलक देता है। यह कहानी बताती है कि कैसे 11 साल की नन्ही काजोल ने अपनी परदादी से मिलने की जिद में बोर्डिंग स्कूल से भागने की कोशिश की थी। यह घटना आज भी उनके फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और उनके जीवन के शुरुआती दिनों की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है।
परदादी से मिलने की जिद और भागने का प्लान
बात उस समय की है, जब काजोल पंचगनी के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थीं। वह महज 11 साल की थीं, और अपने स्वभाव की तरह ही काफी जिद्दी भी थीं। एक दिन उन्हें खबर मिली कि उनकी परदादी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है। यह सुनकर काजोल परेशान हो गईं और उन्होंने तुरंत घर जाकर उनसे मिलने का फैसला किया। लेकिन, उनके परिवार ने उन्हें स्कूल से घर आने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी को हैरान कर दिया।
11 साल की उम्र में उठाया था बड़ा कदम
परिवार की अनुमति न मिलने पर काजोल ने अपनी एक सहेली के साथ मिलकर स्कूल से भागने का फैसला किया। उन्होंने रात में चुपके से अपने सामान पैक किए और स्कूल से निकल गईं। उनका इरादा बस पकड़कर मुंबई पहुंचना और अपनी बीमार परदादी को देखना था। हालांकि, उनका यह प्लान कामयाब नहीं हो सका। स्कूल प्रशासन को उनके भागने की भनक लग गई, और इससे पहले कि वे बस स्टॉप से कहीं दूर जा पाते, उन्हें पकड़ लिया गया। स्कूल स्टाफ ने उन्हें वापस स्कूल ले आया और यह किस्सा हमेशा के लिए उनके बचपन की एक मजेदार याद बन गया।
सफलता की सीढ़ियां और बेबाक अंदाज
काजोल का बचपन से ही मनमौजी और बेबाक स्वभाव रहा है। यह स्वभाव उनके फिल्मी करियर में भी नजर आया। उन्होंने 1992 में फिल्म ‘बेखुदी’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘फन्ना’ और ‘माय नेम इज खान’ जैसी कई हिट फिल्में दीं। उनकी अभिनय क्षमता और उनका स्वाभाविक अंदाज उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक बनाता है। फिल्मों में उनके किरदार भी अक्सर उनकी असली शख्सियत की तरह ही मजबूत और बिंदास होते हैं।
परिवार की विरासत और उनका संघर्ष
काजोल का परिवार भी फिल्मी दुनिया से जुड़ा हुआ था। उनकी मां, तनुजा, एक जानी-मानी अभिनेत्री थीं और उनके पिता, शोमू मुखर्जी, एक सफल निर्देशक थे। फिल्मी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, काजोल ने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई। उन्होंने न केवल अपने किरदारों में जान डाली, बल्कि अपनी शर्तों पर काम भी किया। उनका यह बचपन का किस्सा दिखाता है कि उनका आत्म-विश्वास और अपनी बात पर अड़े रहने का स्वभाव बचपन से ही मजबूत रहा है, जिसने उन्हें जीवन और करियर दोनों में सफलता दिलाई।