सिबिल स्कोर: सिर्फ लोन नहीं, अब नौकरी में भी बन रहा रोड़ा

अब बैंक की नौकरी के लिए आवेदन करते समय सिबिल स्कोर की अनिवार्यता खत्म, लेकिन फाइनल सेलेक्शन से पहले दिखानी होगी 'क्लियर क्रेडिट हिस्ट्री'।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • अब तक केवल लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला सिबिल स्कोर अब नौकरी के लिए भी अहम हो गया है, खासकर बैंकिंग सेक्टर में।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) ने इस साल से आवेदन के समय 650 सिबिल स्कोर की शर्त को हटा दिया है।
  • हालांकि, अंतिम नियुक्ति से पहले उम्मीदवार को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं होने का प्रमाण देना होगा, अन्यथा ऑफर लेटर रद्द किया जा सकता है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 अगस्त, 2025: अगर आप बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। अब तक सिर्फ लोन या क्रेडिट कार्ड की मंजूरी के लिए देखा जाने वाला आपका सिबिल स्कोर अब आपकी नौकरी की संभावनाओं पर भी सीधा असर डाल सकता है। दरअसल, पिछले साल तक बैंकिंग भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था आईबीपीएस ने एक नियम बनाया था, जिसमें बैंकिंग जॉब के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए कम से कम 650 का सिबिल स्कोर अनिवार्य था। इस नियम से कई छात्रों, विशेषकर उन लोगों को दिक्कत हो रही थी, जिनके पास एजुकेशन लोन था और वे उसे चुकाने में असमर्थ थे।

संसद में भी यह मुद्दा उठा, जिस पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 2024-25 की भर्ती से इस नियम को हटा दिया गया है। अब आवेदन के समय सिबिल स्कोर की जरूरत नहीं होगी, लेकिन यह राहत सिर्फ शुरुआती है।

अब क्या है नया नियम? ऐसे मिल सकती है NOC

नए नियम के मुताबिक, अब उम्मीदवार बिना किसी न्यूनतम सिबिल स्कोर के बैंक में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, असली चुनौती तब आएगी जब आप परीक्षा पास कर लेंगे और आपको जॉइनिंग लेटर मिलेगा। नौकरी जॉइन करने से पहले हर उम्मीदवार को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट दिखाकर यह साबित करना होगा कि उसकी क्रेडिट हिस्ट्री साफ है।

यदि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी है, जैसे किसी लोन की ईएमआई का भुगतान समय पर न करना या क्रेडिट कार्ड बिल का बकाया, तो आपको संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) लाना होगा। अगर आप ऐसा करने में असफल रहते हैं, तो बैंक आपके ऑफर लेटर को रद्द कर सकता है। इस संबंध में अंतिम फैसला संबंधित बैंक के बोर्ड का होगा।

बैंकों ने क्यों बनाया यह नियम?

सरकार का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने बोर्ड द्वारा संचालित होते हैं और वे चाहते हैं कि उनके कर्मचारी वित्तीय रूप से अनुशासित हों। यह एक तर्कसंगत कदम है, क्योंकि बैंक कर्मचारी जनता के पैसों और संवेदनशील वित्तीय लेनदेन को संभालते हैं। ऐसे में, यदि किसी कर्मचारी की अपनी वित्तीय स्थिति ही खराब है, तो उस पर भरोसा करना मुश्किल हो सकता है। इसीलिए सिबिल स्कोर को उनकी विश्वसनीयता और ईमानदारी का पैमाना माना गया है।

सिबिल स्कोर को बेहतर कैसे रखें?

सिबिल स्कोर, 300 से 900 के बीच का एक नंबर है, जो आपके कर्ज और भुगतान के इतिहास को दर्शाता है। इसे बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ बातें ध्यान में रखनी जरूरी हैं:

अपनी सभी ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान हमेशा समय पर करें।

क्रेडिट कार्ड का अत्यधिक उपयोग न करें और क्रेडिट लिमिट का 30-40% से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें।

नियमित रूप से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें और किसी भी गलती को तुरंत ठीक करवाएं।

ये छोटे-छोटे कदम न केवल आपके लिए लोन लेना आसान बनाएंगे, बल्कि आपके करियर की राह में भी आने वाली बाधाओं को दूर कर सकते हैं।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.