पीएम मोदी ने किया कर्तव्य भवन का उद्घाटन: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का पहला भवन

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का पहला चरण हुआ पूरा, जानें इस नए और अत्याधुनिक भवन की 9 सबसे खास बातें।

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  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया है, जो कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट प्रोजेक्ट के तहत बनने वाला पहला भवन है।
  2. यह भवन आधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन से सुसज्जित है, और इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक कुशल बनाना है।
  3. इस भवन में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय और विभाग शिफ्ट होंगे, जो दशकों से पुराने और असुविधाजनक इमारतों में काम कर रहे थे।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 अगस्त, 2025 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कर्तव्य भवन का उद्घाटन कर एक नए और आधुनिक भारत की नींव रखी। यह भवन सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बनने वाले कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) का पहला हिस्सा है। इस भवन का उद्घाटन सरकार की दक्षता और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कर्तव्य भवन के साथ ही, भारत की राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को एक नई दिशा मिलेगी, जो दशकों से औपनिवेशिक काल की पुरानी इमारतों में चल रही थी।

क्या है कर्तव्य भवन और इसका महत्व?

कर्तव्य भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका नाम ‘कर्तव्य’ ही इसके उद्देश्य को दर्शाता है। यह भवन सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक ही छत के नीचे लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैले इस भवन में दो बेसमेंट और सात मंजिलें हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना, कागजी कार्रवाई को कम करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करना है। गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास और MSME जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय यहां से अपना कार्य संचालित करेंगे, जिससे सरकारी कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का विजन

कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) एक दूरदर्शी परियोजना है, जिसका लक्ष्य भारत सरकार के सभी मंत्रालयों को 10 अलग-अलग, लेकिन आपस में जुड़े हुए, भवनों में स्थापित करना है। इसका उद्देश्य सरकारी भवनों के पुराने और असुविधाजनक ढांचे को बदलना है। शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य सभी सरकारी कार्यालयों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल कार्यस्थल प्रदान करना है, जिससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़े और सरकार की कार्यक्षमता में सुधार हो।

जानें कर्तव्य भवन से जुड़ी 9 खास बातें

CCS का पहला भवन: कर्तव्य भवन कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के तहत बनने वाली पहली इमारत है, जिसे तेजी से पूरा किया गया है।

कई मंत्रालय होंगे शिफ्ट: इस भवन में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, MSME, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, और DoPT जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग शिफ्ट होंगे।

उत्तर ब्लॉक से ऐतिहासिक बदलाव: गृह मंत्रालय और DoPT 90 वर्षों के बाद अपने पुराने उत्तर ब्लॉक भवन को छोड़कर इस नई इमारत में आ रहे हैं।

पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन: भवन में 30% कम ऊर्जा का उपयोग होगा। इसके लिए तापमान नियंत्रित करने वाली खिड़कियां, मोशन-सेंसर LED लाइट्स और स्मार्ट पावर-सेविंग लिफ्ट लगाई गई हैं।

आउटडेटेड इमारतों को बदलेगा: यह परियोजना शास्त्री भवन, कृषि भवन और उद्योग भवन जैसी पुरानी और अक्षम इमारतों की जगह लेगी।

अस्थायी शिफ्टिंग: अन्य भवनों के निर्माण के दौरान, कार्यालयों को अस्थायी रूप से कस्तूरबा गांधी मार्ग और मिंटो रोड जैसी जगहों पर शिफ्ट किया जाएगा।

परियोजना की समय सीमा: कुल 10 CCS भवनों का निर्माण जून 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

कुछ पुराने भवन रहेंगे: राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय अभिलेखागार और जवाहरलाल नेहरू भवन जैसी कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों को बरकरार रखा जाएगा।

सेंट्रल विस्टा का हिस्सा: CCS परियोजना सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं।

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