संसद के मानसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमागरम बहस: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, पीएम मोदी का जोरदार पलटवार
'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में संग्राम: सरकार ने गिनाई उपलब्धियां, विपक्ष ने पूछा 'पाक से समझौता क्यों?'
- संसद के मानसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर 16 घंटे की मैराथन बहस जारी।
- पीएम मोदी, राजनाथ सिंह और अमित शाह ने ऑपरेशन की सफलता पर जोर दिया, विपक्ष ने उठाए सवाल।
- राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले दावे पर सरकार को घेरा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 जुलाई, 2025: संसद के मानसून सत्र में इन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े एक बड़े मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए सीमा पार सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मैराथन चर्चा जारी है। सरकार जहां इस ऑपरेशन को अपनी बड़ी सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष ने हमले को रोकने में कथित खुफिया विफलता, ऑपरेशन के रुकने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावों पर सरकार को घेरा है।
सरकार का मजबूत पक्ष: ‘आतंकियों को घर में घुसकर मारा’
बहस की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों सदनों में की। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की संप्रभुता, अस्मिता और आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक प्रदर्शन बताया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि 7 से 10 मई तक चला यह ऑपरेशन, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और 100 से अधिक आतंकी मारे गए, केवल ‘स्थगित’ किया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने फिर दुस्साहस किया तो भारत की सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में घोषणा की कि पहलगाम आतंकी हमले में शामिल तीनों आतंकवादियों को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मार गिराया गया है, जिसमें मास्टरमाइंड सुलेमान भी शामिल था। इस खबर ने विपक्ष के हमलों की धार को कुछ हद तक कुंद कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए पहलगाम हमले को ‘क्रूरता की पराकाष्ठा’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने 22 अप्रैल के हमले का बदला 22 मिनट में लिया है, आतंकियों के ठिकानों को पाकिस्तान के हर कोने में जाकर तबाह किया है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ‘सिंदूर की सौगंध’ पूरी करने और आतंक के हेडक्वार्टर को मिट्टी में मिलाने जैसा था। उन्होंने उन लोगों को आईना दिखाया जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिख रहा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ट्रंप के मध्यस्थता के दावों को सिरे से खारिज किया और बताया कि पाकिस्तान ने सैन्य चैनल के माध्यम से ही युद्धविराम का अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 9 मई को ही पीएम मोदी को बड़े पाकिस्तानी हमले की चेतावनी दी थी।
विपक्ष के तीखे सवाल: ‘सरकार की विफलता, पारदर्शिता की कमी’
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने सरकार पर तीखे हमले किए। लोकसभा में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पहलगाम हमले को रोकने में सरकार की विफलता पर सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि आतंकवादी पहलगाम तक कैसे पहुंचे और उन्हें न्याय क्यों नहीं मिला। उन्होंने राफेल जेट के नुकसान और सरकार की ‘सीजफायर’ नीति पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में सरकार को घेरते हुए कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिर्फ 30 मिनट में रुक गया और पाकिस्तान को सूचित कर दिया गया कि भारत ‘गैर-सैन्य ठिकानों’ पर हमला कर रहा है। राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 29 बार के उस दावे का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने का दावा किया था, और पीएम मोदी को सदन में ‘ट्रंप को झूठा’ कहने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का होना ही सरकार की विफलता है, और इससे देश की संप्रभुता कमजोर हुई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सुरक्षा एजेंसियों की विफलता पर सवाल उठाए।
बिहार SIR पर भी विपक्ष का दबाव
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस के बीच, विपक्ष ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के मुद्दे पर भी चर्चा की मांग जारी रखी। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग का यह अभ्यास आगामी बिहार चुनावों में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर नियमानुसार अलग से बहस पर विचार करेगी।
कुल मिलाकर, मानसून सत्र का यह सप्ताह राष्ट्रीय सुरक्षा के एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक तकरार का गवाह बना है, जिसमें सरकार अपनी उपलब्धियों पर जोर दे रही है और विपक्ष पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है।