हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़: 6 श्रद्धालुओं की मौत, 35 घायल
मनसा देवी मंदिर हादसा: धार्मिक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन की जांच जारी
- हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़ मचने से 6 श्रद्धालुओं की मौत।
- हादसे में 35 से अधिक लोग घायल, कई की हालत गंभीर।
- एक अफवाह के कारण मंदिर परिसर में अचानक भगदड़ मच गई।
समग्र समाचार सेवा
हरिद्वार, 27 जुलाई, 2025: उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में आज दर्शन के दौरान एक दर्दनाक भगदड़ मच गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें तत्काल स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में किसी अफवाह के फैलने के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है और प्रशासन बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।
कैसे हुआ ये दर्दनाक हादसा?
जानकारी के मुताबिक, मनसा देवी मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे थे। त्योहार का दिन होने के कारण भीड़ काफी ज्यादा थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के शुरुआती बयान के अनुसार, मंदिर के एक संकरे मार्ग पर अचानक किसी अफवाह के फैलने से लोगों में भगदड़ मच गई। यह अफवाह किसी मामूली घटना या किसी के गिरने से भी शुरू हो सकती है, जिससे भीड़ में डर फैल गया। भीड़ अनियंत्रित हो गई और एक-दूसरे को धकेलने लगी, जिससे कई लोग नीचे गिर गए और कुचले गए।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। घायलों को निकालने और उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए तेजी से बचाव अभियान शुरू किया गया। घटनास्थल पर एंबुलेंस की लंबी कतारें देखी गईं, जो घायलों को अस्पताल ले जाने में जुटी थीं।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जहां वर्ष भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, खासकर त्योहारों के दौरान। ऐसे में, भीड़ को नियंत्रित करने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए उचित व्यवस्था की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, स्वयंसेवकों की पर्याप्त संख्या, और आपातकालीन निकासी मार्गों की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा, अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए प्रभावी संचार प्रणाली भी आवश्यक है। उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की है और घायलों के समुचित इलाज का आश्वासन दिया है।
शोक और सांत्वना का माहौल
इस दुखद घटना पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। हरिद्वार में इस हादसे के बाद शोक का माहौल है। कई श्रद्धालु जो दर्शन के लिए आए थे, वे इस घटना से स्तब्ध और भयभीत हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि धार्मिक आयोजनों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। प्रशासन को भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों की समीक्षा और उन्हें मजबूत करने की आवश्यकता है।