1 अगस्त से बदल जाएँगे UPI के 3 बड़े नियम: हर यूजर के लिए जानना जरूरी

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली ,26 जुलाई – अगर आप मोबाइल से पैसे भेजते हैं, बिल भरते हैं या बैलेंस चेक करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 1 अगस्त 2025 से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े तीन नए नियम लागू होने जा रहे हैं। इन नियमों का उद्देश्य UPI सिस्टम को और अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तेज बनाना है।
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा इन बदलावों की घोषणा की गई है, जो सीधे तौर पर भारत के करोड़ों डिजिटल पेमेंट यूजर्स को प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए नियम:

 1. रोजाना सिर्फ 50 बार ही बैलेंस चेक

अब UPI यूजर्स केवल प्रति दिन 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएंगे। अभी तक इस पर कोई सीमा नहीं थी, जिससे कई लोग दिन में कई बार बैलेंस जांचते थे और इससे बैंकिंग सर्वर पर अतिरिक्त लोड पड़ता था।
NPCI का मानना है कि यह सीमा तकनीकी भार को कम करेगी और नेटवर्क की स्पीड व रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा।

 2. पीक आवर्स में बैलेंस चेक की सुविधा नहीं

UPI नेटवर्क पर अधिक लोड वाले समय, यानी सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, अब बैलेंस चेक की सुविधा आंशिक रूप से बंद रहेगी।
इस अवधि में केवल सीमित संख्या में बैलेंस चेक की अनुमति होगी। इससे बैंक सर्वर पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ेगा और लेनदेन प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।
NPCI का तर्क है कि बैलेंस चेक जैसी गैर-आवश्यक गतिविधियों को पीक टाइम में कम किया जाए, ताकि मुख्य ट्रांजेक्शनों को प्राथमिकता दी जा सके।

 3. फंसी हुई ट्रांजेक्शन की जानकारी लेने के लिए भी समयसीमा तय

अब जब कोई UPI ट्रांजेक्शन फंस जाती है (pending या processing में रहती है), तो यूजर बार-बार उसका स्टेटस चेक करते हैं। इससे सर्वर पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है।
नए नियम के अनुसार, यूजर पहली बार ट्रांजेक्शन स्टेटस जानने के लिए तुरंत रिक्वेस्ट भेज सकता है, लेकिन उसके बाद अगली स्टेटस अपडेट केवल 30 मिनट बाद ही मिलेगी।
NPCI का कहना है कि यह बदलाव सर्वर ट्रैफिक को नियंत्रित करने और सिस्टम को डाउन होने से बचाने के लिए किया गया है।

 नए नियम क्यों जरूरी हैं?

NPCI के मुताबिक, भारत में हर दिन 40 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजेक्शन होते हैं। बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ सर्वर पर लोड भी बढ़ा है।
इन नियमों से न केवल प्रदर्शन बेहतर होगा, बल्कि ट्रांजेक्शन विफलता और तकनीकी समस्याओं में भी कमी आएगी।

UPI का उपयोग अब केवल शहरी ही नहीं, ग्रामीण भारत में भी तेजी से हो रहा है। ऐसे में सिस्टम को स्थिर बनाए रखना जरूरी है।
1 अगस्त से लागू होने वाले ये नियम आपको शुरुआत में असुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में ये UPI अनुभव को अधिक विश्वसनीय और कुशल बनाएँगे।

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