वैश्विक व्यापार में भारत ने रचा नया कीर्तिमान: अमित शाह ने भारत-यूके एफटीए को बताया ऐतिहासिक

भारत-यूके एफटीए: मोदी सरकार की 'जन-केंद्रित व्यापार कूटनीति' की जीत, समृद्धि का नया युग

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  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ‘ऐतिहासिक’ बताया।
  • उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के वैश्विक व्यापार में एक और मील का पत्थर है।
  • एफटीए से किसानों, मछुआरों, कारीगरों और कई उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26 जुलाई, 2025: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस समझौते को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि यह भारत के वैश्विक व्यापार में एक और महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित करेगा। शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐतिहासिक समझौते के लिए बधाई दी और इसे प्रत्येक नागरिक के लिए गौरव और संभावनाओं का क्षण बताया। भारत और यूके ने गुरुवार को इस एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 112 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।

‘जन-केंद्रित व्यापार कूटनीति’ का उदाहरण

श्री अमित शाह ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत ने वैश्विक व्यापार में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। यह हर नागरिक के लिए गौरव और संभावनाओं का क्षण है। ऐतिहासिक भारत-यूके एफटीए पर हस्ताक्षर के लिए पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक बधाई।”

उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की ‘जन-केंद्रित व्यापार कूटनीति’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो देश के किसानों के लिए समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत करेगा। शाह ने बताया कि इस एफटीए से कृषि निर्यात के 95 प्रतिशत और समुद्री उत्पादों के निर्यात के 99 प्रतिशत पर लगने वाले शुल्क समाप्त हो जाएंगे, जिससे किसानों और मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा। यह कदम कृषि और समुद्री उत्पाद क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोलेगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा, स्थानीय उत्पाद होंगे वैश्विक

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ संकल्प को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे कारीगरों, बुनकरों, कपड़ा, चमड़ा, जूते-चप्पल, रत्न और आभूषण तथा खिलौनों के लिए व्यापक बाजार खोलेगा, जिससे हमारे स्थानीय उत्पादों का वैश्वीकरण होगा और उनकी क्षमता एक नई ऊंचाई तक पहुंचेगी।

एफटीए से भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा और जूते-चप्पल को लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि ब्रिटिश बाजार में उन्हें शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इस समझौते से भारत में ब्रिटिश कारों और व्हिस्की जैसी वस्तुओं की कीमतों में कमी आने की संभावना है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा।

व्यापार और निवेश के नए अवसर

यह ऐतिहासिक समझौता भारत और यूके के बीच व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसरों को खोलेगा। यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलेगा। उनका अनुमान है कि यह समझौता ब्रिटेन में लगभग 6 बिलियन पाउंड का नया निवेश और निर्यात लाएगा, जिससे 2,200 से अधिक ब्रिटिश नौकरियां पैदा होंगी। भारतीय कंपनियों द्वारा यूके में अपने संचालन का विस्तार करने और ब्रिटिश कंपनियों द्वारा भारत में नए व्यापार के अवसर हासिल करने से यह संभव होगा।

कुल मिलाकर, भारत-यूके एफटीए भारत के वैश्विक व्यापार महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन तथा विभिन्न भारतीय क्षेत्रों के लिए नए बाजार के अवसरों को बढ़ावा देगा।

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