भारत-नेपाल सीमा बातचीत छह साल बाद फिर शुरू

छह साल बाद फिर शुरू होंगे भारत-नेपाल सीमा वार्ता, बदले हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य में अहम बैठक

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समग्र समाचार सेवा 
नई दिल्ली 26 जुलाई –भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब समाप्त होता दिख रहा है। 27 जुलाई से 29 जुलाई 2025 के बीच नई दिल्ली में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच सीमा वार्ता आयोजित होने जा रही है। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, और भारत-नेपाल संबंधों को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

छह साल बाद फिर से शुरू हो रही है बातचीत

भारत और नेपाल के बीच सीमा संबंधी बातचीत 2019 के बाद से स्थगित थी। उस समय नेपाल की संसद ने नया राजनीतिक नक्शा पारित किया था, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया गया था। भारत ने इस कदम को “ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ” बताते हुए इसे खारिज कर दिया था। उसके बाद से दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ताएं ठप पड़ी थीं।

किन मुद्दों पर होगी बात?

वार्ता में मुख्य रूप से तीन संवेदनशील क्षेत्रों—लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा—को लेकर ऐतिहासिक दस्तावेज, प्रशासनिक नियंत्रण, और भू-चिन्हों के आधार पर चर्चा होगी।
भारत पहले से ही कहता रहा है कि ये इलाके उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा हैं और वहां भारतीय सेना की मौजूदगी दशकों पुरानी है। वहीं, नेपाल का दावा है कि ये क्षेत्र 1816 की सुगौली संधि के अनुसार नेपाल का हिस्सा हैं।

क्यों अहम है यह वार्ता?

यह वार्ता सिर्फ एक सीमा विवाद के समाधान की दिशा में प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत-नेपाल संबंधों की पुनर्स्थापना का संकेत भी है।
बीते वर्षों में चीन ने नेपाल में राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है। भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से जरूरी हो गया है कि वह नेपाल के साथ भरोसे और संवाद की बहाली करे।
इसके अलावा, बुद्धिस्ट सर्किट, ऊर्जा व्यापार, सीमा व्यापार, जल संसाधन प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में सहयोग जैसे विषय भी भारत-नेपाल संबंधों की नई धुरी बन सकते हैं।

राजनीतिक संकेत और उम्मीदें

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के सर्वेक्षण विभाग, भू-राजनीतिक विशेषज्ञ, और सीमा आयोग के अधिकारी इस वार्ता में भाग लेंगे।
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ की हालिया चीन-निरपेक्ष नीति और भारत के साथ संतुलन की कूटनीति को देखते हुए यह वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ने की उम्मीद है।

भारत और नेपाल के बीच साझा सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच की यह सीमा वार्ता न केवल विवादों को सुलझाने का अवसर है, बल्कि यह साझे भविष्य के लिए विश्वास बहाली का एक महत्वपूर्ण कदम भी हो सकता है।

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