पीएम मोदी का मालदीव दौरा: मुइज्जू ने किया भव्य स्वागत, क्या सुधर रहे हैं संबंध?

भारत-मालदीव संबंध: पीएम मोदी के दौरे से सुलझी 'इंडिया आउट' की गांठ, चीन को भी संदेश

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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भव्य स्वागत किया, संबंधों में सुधार का संकेत।
  • पीएम मोदी ने मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
  • यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

समग्र समाचार सेवा
माले, 25 जुलाई, 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात (24 जुलाई) ब्रिटेन का अपना दौरा खत्म करने के बाद मालदीव के लिए उड़ान भरी, जहां शुक्रवार (25 जुलाई) को उनका मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने असाधारण रूप से भव्य स्वागत किया। यह यात्रा दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में उपजे तनावपूर्ण संबंधों को ‘रीसेट’ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। राष्ट्रपति मुइज्जू, जो पहले ‘इंडिया आउट’ अभियान के मुखर समर्थक थे, ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर स्वागत किया, उनके साथ मंत्रियों का एक बड़ा दल भी मौजूद था। इस गर्मजोशी भरे स्वागत ने वैश्विक स्तर पर यह संदेश दिया है कि भारत और मालदीव अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए तैयार हैं।

भव्य स्वागत और ऐतिहासिक पल

प्रधानमंत्री मोदी के मालदीव आगमन पर राजधानी माले को रंगीन बैनरों, विशाल पोस्टरों और भारतीय राष्ट्रीय ध्वजों से सजाया गया था। रक्षा मंत्रालय की इमारत पर प्रधानमंत्री मोदी की एक विशाल तस्वीर भी लगाई गई, जो स्वागत की भव्यता को दर्शाती है। रिपब्लिक स्क्वायर पर प्रधानमंत्री मोदी को 21 तोपों की सलामी दी गई, गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया गया और बच्चों द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रदर्शन भी किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जो भारत और मालदीव के बीच राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। यह मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख की मालदीव की पहली राजकीय यात्रा है, जो इस दौरे के महत्व को और बढ़ा देती है। प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव में भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की, जहां उन्हें भारी उत्साह के साथ तिरंगा लहराते और नारे लगाते हुए देखा गया।

संबंधों को ‘रीसेट’ करने का एजेंडा

मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत और मालदीव के संबंधों में खटास आ गई थी, जब उनकी सरकार ने ‘इंडिया आउट’ अभियान का समर्थन किया और मालदीव में तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की मांग की। हालांकि, भारत ने धैर्य और कूटनीति का परिचय दिया और मालदीव की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए लगातार सहयोग जारी रखा।

इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू के बीच व्यापक चर्चाएँ हुईं। एजेंडे में कई भारत-सहायता प्राप्त विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर शामिल हैं। इनमें द्विपक्षीय निवेश संधि और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू करने का निर्णय भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। भारत ने मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन देने की भी घोषणा की है, जो मालदीव की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है और चीन के बढ़ते प्रभाव का जवाब भी है।

‘पड़ोसी पहले’ नीति का महत्व

भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए ‘सागर’ (MAHASAGAR) विजन में मालदीव एक प्रमुख भागीदार रहा है। भारतीय उच्चायुक्त जी. बालसुब्रमण्यम ने दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों पर जोर दिया। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए पिछले साल अंतिम रूप दिए गए संयुक्त विजन के एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-मालदीव संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने का संकेत देती है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध फिर से प्रगाढ़ होंगे। यह हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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