भारतीय सेना की म्यांमार में ULFA-I और NSCN-K पर सर्जिकल स्ट्राइक
पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों पर भारत का बड़ा प्रहार
- भारतीय सेना ने म्यांमार में ULFA-I और NSCN-K के ठिकानों पर ड्रोन से सर्जिकल स्ट्राइक की।
- ULFA-I ने तीन वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने का दावा किया, 19 अन्य घायल।
- यह ऑपरेशन भारत-म्यांमार सीमा के पास नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में हुआ।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 जुलाई: रविवार सुबह तड़के, भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा के अंदर सक्रिय उग्रवादी संगठन ULFA-I (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट) और NSCN-K (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग) के ठिकानों पर एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना ने इन आतंकवादी ठिकानों पर ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला शुरू की, जिससे इन संगठनों को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। ULFA-I ने दावा किया है कि इस हमले में उसके तीन वरिष्ठ नेता मारे गए हैं, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
यह ऑपरेशन भारत-म्यांमार सीमा के पास नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में स्थित उग्रवादी शिविरों को निशाना बनाकर किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस सर्जिकल स्ट्राइक में सौ से अधिक मानवरहित हवाई वाहनों (ड्रोन) का इस्तेमाल किया गया। यह कार्रवाई कथित तौर पर म्यांमार सेना के साथ करीबी समन्वय में की गई थी, जो दर्शाता है कि दोनों देशों की सेनाएं सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं।
प्रमुख ठिकाने निशाने पर: ULFA-I को बड़ा झटका
हमले में ULFA-I के जिन शिविरों को निशाना बनाया गया, उनमें होयत बस्ती में स्थित संगठन का पूर्वी कमान मुख्यालय (ECHQ) और वाकथम बस्ती में स्थित 779 शिविर शामिल थे। ऑपरेशन में इस संगठन के दो अन्य शिविरों पर भी हमला किया गया। माना जा रहा है कि ULFA-I के शीर्ष कमांडर नयन मेधी, जिन्हें नयन असम के नाम से भी जाना जाता है, इस हमले में मारे गए हैं। नयन मेधी को परेश बरुआ के नेतृत्व वाले इस प्रतिबंधित संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार और सैन्य प्रशिक्षक माना जाता था, और उनकी मौत से संगठन को एक बड़ा झटका लग सकता है।
इसी तरह, NSCN-K के कई शिविरों को भी इस ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया, जिससे इस संगठन को भी काफी क्षति पहुंची है। यह दर्शाता है कि भारतीय सेना ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की है ताकि सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।
ULFA-I की पुष्टि और बदले की धमकी
ULFA-I ने एक प्रेस बयान में ड्रोन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि ये हमले सुबह 2 बजे से 4 बजे के बीच कई मोबाइल शिविरों पर किए गए। संगठन ने बताया कि इस हमले में उसका एक वरिष्ठ नेता मारा गया है, जबकि लगभग 19 अन्य घायल हुए हैं। बयान में कहा गया कि नागालैंड-म्यांमार सीमा और अरुणाचल-म्यांमार सीमा के पास स्थित RPF और PLA के नजदीकी शिविरों के साथ-साथ ULFA-I के शिविरों को भी निशाना बनाया गया। ULFA-I के अनुसार, इस स्ट्राइक में इजराइल और फ्रांस में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।
हालांकि, भारतीय रक्षा बलों ने अभी तक इस तरह के किसी ऑपरेशन की पुष्टि नहीं की है।
मिसाइल हमला और ULFA-I की जवाबी कार्रवाई की कसम
ULFA-I ने बाद में दावा किया कि नयन असम के अंतिम संस्कार के दौरान शिविर पर मिसाइल से हमला किया गया था। बयान में कहा गया कि बाद के मिसाइल हमले में ब्रिगेडियर गणेश असम और कर्नल प्रदीप असम मारे गए। ULFA-I ने यह भी कहा कि उसके शिविरों पर हवाई हमले अभी भी जारी हैं। संगठन ने इस हमले का बदला लेने की कसम खाई है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है।
यह ड्रोन हमला लंबे समय बाद पूर्वोत्तर में अलगाववादी समूहों पर भारतीय सेना द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई है। म्यांमार का वह क्षेत्र जो भारतीय सीमा से सटा हुआ है, लंबे समय से इस क्षेत्र के अलगाववादी समूहों द्वारा शिविर स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, भारत द्वारा पहले कोई बड़ा सीमा पार ऑपरेशन नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि 2003 में रॉयल भूटानी सेना द्वारा भारतीय सेना के सहयोग से भूटान में भी उग्रवादी शिविरों पर इसी तरह के हमले किए गए थे। यह नई कार्रवाई भारतीय सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।