समग्र समाचार सेवा
सिवान, 22 जून: बिहार की राजनीति में छोटे-छोटे इशारे भी बड़े मायने रखते हैं। हाल ही में सिवान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से गर्मजोशी से हाथ मिलाया, जबकि बगल में खड़े लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान बस देखते रह गए। इस घटना ने बिहार एनडीए के भीतर संभावित समीकरणों और भविष्य की राजनीति को लेकर नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।
सिवान में पीएम मोदी का कार्यक्रम
यह वाकया सिवान के बसंतपुर में घटित हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और एनडीए के अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे, उन्होंने सभी नेताओं का अभिवादन किया।
कुशवाहा से गर्मजोशी, चिराग रहे खामोश
जब पीएम मोदी ने उपेंद्र कुशवाहा के पास आकर उनसे हाथ मिलाया, तो उनका अंदाज काफी गर्मजोशी भरा था। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बात भी हुई। इसी दौरान, ठीक बगल में खड़े चिराग पासवान बस यह सब देखते रहे। उनके चेहरे पर कोई खास भाव नहीं थे, लेकिन यह पल कैमरे में कैद हो गया और तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
यह घटना कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रही है। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान दोनों ही बिहार में एनडीए के प्रमुख सहयोगी हैं, खासकर पासवान खुद को “मोदी का हनुमान” बताते रहे हैं। ऐसे में पीएम का कुशवाहा को दिया गया विशेष महत्व और चिराग पासवान की ‘खामोशी’ कई सवालों को जन्म दे रही है:
क्या एनडीए बिहार में नए समीकरण बना रहा है?
क्या चिराग पासवान को दरकिनार किया जा रहा है?
क्या भविष्य में उपेंद्र कुशवाहा की भूमिका बढ़ाई जा सकती है?
जातीय समीकरणों का खेल
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा कोइरी-कुर्मी (कुशवाहा) समुदाय से आते हैं, जिसकी राज्य में अच्छी खासी आबादी है। वहीं, चिराग पासवान दलित समुदाय (खासकर पासवान) के बड़े नेता माने जाते हैं। पीएम मोदी का यह इशारा कुछ लोगों द्वारा कुशवाहा वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यह भी हो सकता है कि पीएम संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हों, ताकि सभी सहयोगी दलों को उचित महत्व मिले।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया
इस घटना पर चिराग पासवान की कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह निश्चित है कि यह वाकया एनडीए के भीतर उनके और उपेंद्र कुशवाहा के बीच की प्रतिद्वंद्विता को और बढ़ा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में बिहार एनडीए में किस तरह के बदलाव आते हैं और इन दोनों नेताओं की भूमिका कैसे आकार लेती है।
यह छोटी सी घटना, जिसने सिवान से लेकर पटना तक सियासी हलकों में गर्मी बढ़ा दी है, दर्शाती है कि बिहार में राजनीति के हर इशारे के गहरे मायने होते हैं।